प्रयागराज, 27 मार्च।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल के शाही जामा मस्जिद से संबंधित कब्रिस्तान की भूमि से संभल जिला प्रशासन द्वारा जारी बेदख़ली नोटिस पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने 1 जनवरी 2026 को जारी नोटिस पर रोक लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने अली अशरफ की याचिका पर पारित किया। याचिकाकर्ता के वकील अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक श्रीत्रिपाठी ने बताया कि प्रशासन ने बिना उचित विवेक और कानूनी प्रावधानों का हवाला दिए नोटिस जारी किया। उनका कहना था कि कब्रिस्तान के एक हिस्से को आबादी घोषित कर हिंदुओं के नाम दर्ज किया गया, जबकि दूसरे हिस्से को खाली कराने के लिए कहा गया।
अधिवक्ता ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 को इसी कब्रिस्तान को लेकर कल्कि सेना की शिकायत पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने याचिकाकर्ता के पक्ष में आदेश दिया था और कहा था कि सभी पक्षों की मौजूदगी में भूमि की पैमाइश कर निर्णय लिया जाए। बावजूद इसके, प्रशासन ने अगले ही दिन 1 जनवरी 2026 को बिना निर्णय लिए भूमि खाली कराने का नोटिस जारी कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन का नोटिस बिना किसी कानूनी प्रावधान का हवाला दिए और कोर्ट के आदेश की अनदेखी करते हुए जल्दबाज़ी में जारी किया गया। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई छह मई के लिए निर्धारित की है।












