25 मार्च, नई दिल्ली
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को नई दिल्ली में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली से मुलाकात की। बातचीत का मुख्य केंद्र पश्चिम एशियाई संघर्ष रहा। मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान में भारतीयों को दी जा रही सहायता की सराहना करते हैं।
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने ईद और नवरोज के शुभ अवसर पर शुभकामनाएं साझा कीं और आशा व्यक्त की कि यह पर्व क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हालिया हमलों की निंदा की और कहा कि ऐसे कृत्य क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करते हैं। उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी जोर दिया। इसके अलावा, ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में ईरान के सहयोग की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में बताया कि तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा यह संघर्ष वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर रहा है, जिसका भारत पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। इस कारण पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो रही है।
उन्होंने कहा कि भारत ने सक्रिय कूटनीतिक प्रयास किए हैं और उन्होंने पश्चिम एशियाई देशों के प्रमुख नेताओं से व्यक्तिगत रूप से संवाद किया। भारत खाड़ी देशों, ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ संपर्क बनाए हुए है। उद्देश्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाल करना और होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखना है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक जहाजों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बाधा अस्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा कि भारत सभी हमलों का विरोध करता है और मानव जीवन के सुरक्षित रहने के लिए सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास जारी रखेगा।









