दमिश्क, 20 अप्रैल।
इराक और सीरिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों और व्यापारिक गतिविधियों के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। लगभग 13 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इराक ने सीरिया से सटी अपनी महत्वपूर्ण राबिया बॉर्डर क्रॉसिंग को आधिकारिक तौर पर फिर से खोल दिया है। इस फैसले का प्राथमिक उद्देश्य सड़क मार्ग के जरिए ईंधन तेल (फ्यूल ऑयल) के निर्यात में तेजी लाना और युद्ध व संघर्ष के कारण ठप पड़े व्यापारिक तंत्र को दोबारा सक्रिय करना है।
इराक के उत्तरी हिस्से में स्थित नीनवे प्रांत की यह सीमा चौकी अब भारी ट्रकों और टैंकरों के माध्यम से ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। सीरियाई सीमा पर 'यारुबिया' के नाम से पहचानी जाने वाली इस क्रॉसिंग के खुलने से अब दोनों देशों के बीच के सभी प्रमुख जमीनी रास्ते पूरी तरह क्रियाशील हो गए हैं। यह कदम क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
गौरतलब है कि यह मार्ग कभी दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक गतिविधियों की जीवनरेखा हुआ करता था। हालांकि, वर्ष 2014 में आईएसआईएस के उदय और सीमावर्ती इलाकों पर आतंकियों के कब्जे के बाद इसे सुरक्षा कारणों से बंद करना पड़ा था। आतंकियों के खात्मे के बाद भी यह रास्ता लंबे समय तक केवल सीमित मानवीय मदद के लिए ही इस्तेमाल होता रहा, लेकिन अब इसे पूर्ण व्यावसायिक उपयोग के लिए बहाल कर दिया गया है।
सीमा प्राधिकरण के प्रमुख ओमर अल-वाएली ने इस मार्ग की बहाली को "रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण" करार दिया है। उन्होंने बताया कि इससे सीरिया को होने वाली ईंधन आपूर्ति सुगम होगी और पश्चिमी इराक के अल-वलीद बॉर्डर पर ट्रकों के भारी दबाव में कमी आएगी। वर्तमान में समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की बाधाओं को देखते हुए इराक की तेल कंपनी एसओएमओ अब जमीनी रास्तों से निर्यात बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। आने वाले दिनों में इस मार्ग से टैंकरों की आवाजाही बढ़ने से इराक के परिवहन ढांचे पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।









