नई दिल्ली, 20 अप्रैल
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने सोमवार को स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए भारत और दक्षिण कोरिया को मिलकर समन्वित प्रयास करने होंगे। उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर बल दिया।
राष्ट्रपति ली ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ रहा है, साथ ही आवश्यक औद्योगिक सामग्रियों की आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो रही है। उनका मानना है कि इस स्थिति से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत और कोरिया गणराज्य दोनों ही अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर मध्य पूर्व पर निर्भर हैं, जिसमें कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस प्रमुख हैं। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना दोनों देशों के आर्थिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
राष्ट्रपति ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। इसके साथ ही, वैश्विक अनिश्चितताओं को कम करने और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने के लिए बहुपक्षीय स्तर पर भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने भरोसा जताया कि दक्षिण कोरिया भारत के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखेगा, ताकि इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देश इस दिशा में साझा प्रयास करेंगे।
राष्ट्रपति ली ने आवश्यक खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक आयात आधारित मॉडल से आगे बढ़ते हुए, कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के खनन व रिफाइनिंग क्षेत्र को जोड़कर स्थिर आपूर्ति व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
इसके अलावा उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा, शिपबिल्डिंग और वित्त जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ नए रणनीतिक क्षेत्रों में भी साझेदारी को मजबूत किया जाएगा।
यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय शिखर बैठक से पहले आया है, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर चर्चा होने की संभावना है। राष्ट्रपति ली ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता दोहराई।







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