नई दिल्ली, 22 अप्रैल
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत के वस्त्र क्षेत्र ने वैश्विक बाजार में संतुलित वृद्धि दर्ज की है। वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, कुल निर्यात में 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह आंकड़ा बढ़कर 3,16,334.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह निर्यात 3,09,859.3 करोड़ रुपये रहा था, जिसके मुकाबले यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय मांग के निरंतर बने रहने और प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति के कारण संभव हो पाई है। इन श्रेणियों में परिधान, सूत, कपड़े और हस्तशिल्प शामिल हैं।
तैयार परिधान निर्यात में प्रमुख हिस्सेदारी बनाए हुए हैं, जिसमें 2.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 1,39,349.6 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, कपास सूत, वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों में 0.4 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई है, जिससे यह आंकड़ा 1,02,399.7 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर, मानव निर्मित वस्त्रों के निर्यात में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है, जहां 3.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 42,687.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
मूल्य वर्धित उत्पादों में हस्तशिल्प (हस्तनिर्मित कालीनों को छोड़कर) सबसे तेज गति से बढ़ने वाला क्षेत्र रहा है, जिसमें 6.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ निर्यात 15,855.1 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 120 से अधिक देशों में निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है। संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, जापान और कई अफ्रीकी देशों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत का निर्यात दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है।
सरकारी नीतियों का भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। निर्यातकों को राहत देने के लिए राज्य और केंद्र करों एवं उपकरों की वापसी योजना तथा निर्यातित उत्पादों पर शुल्क वापसी योजना को मार्च 2026 के बाद भी जारी रखा गया है।
इसके साथ ही, कई मुक्त व्यापार समझौतों पर हो रही प्रगति से इस क्षेत्र को और गति मिलने की उम्मीद है। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ, ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ समझौते तथा भारत-यूरोपीय संघ समझौते की वार्ताओं के निष्कर्ष से बाजार पहुंच में सुधार, शुल्क में कमी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी मजबूत होने की संभावना जताई गई है।
वस्त्र मंत्रालय का कहना है कि नीतिगत समर्थन और नए बाजारों में विस्तार के चलते निर्यात में यह निरंतर वृद्धि सरकार के उस लक्ष्य को दर्शाती है, जिसके तहत मूल्य वर्धित उत्पादों को बढ़ावा देना, रोजगार सृजन करना और वैश्विक वस्त्र उद्योग में भारत की स्थिति को मजबूत बनाना शामिल है।




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