नई दिल्ली, 22 अप्रैल।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पृथ्वी को “माता” बताते हुए उसके संरक्षण को मानवता के कल्याण से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व बताया है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी की सुरक्षा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक पवित्र संकल्प भी है। इस क्रम में उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने जिस सुभाषित को साझा किया, उसमें पृथ्वी पर स्थिर रूप से स्थित वृक्षों और वानस्पतिक संपदा के माध्यम से संपूर्ण विश्व के पोषण का उल्लेख किया गया है। इसमें पृथ्वी को धेनु के समान बताया गया है, जिससे संतुलित रूप से उपयोग करने की बात कही गई है, लेकिन उसके अहित से बचने का संदेश भी निहित है।
उन्होंने पृथ्वी को नमन करते हुए उसके संतुलित उपयोग और संरक्षण पर विशेष बल दिया तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।






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