मध्य प्रदेश
20 Apr, 2026

जल गंगा संवर्धन अभियान से प्रदेश में जल संरक्षण को मिली नई दिशा

मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है।

भोपाल, 20 अप्रैल

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रहा जल गंगा संवर्धन अभियान जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। इस पहल से ग्रामीण विकास को भी नई गति मिली है और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के साथ नई संरचनाओं का निर्माण तेजी से हो रहा है।

जनभागीदारी के सहयोग से जल प्रबंधन को मजबूती मिली है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के कई जिलों में जल उपलब्धता बढ़ी है, कृषि उत्पादन में सुधार हुआ है और जैव विविधता को संरक्षण मिला है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ हुई है और लोगों की आजीविका में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

छिंदवाड़ा: पालाचौरई में तालाब निर्माण से बढ़ी उत्पादकता छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव विकासखंड का ग्राम पालाचौरई इस अभियान से हरियाली और समृद्धि का उदाहरण बन गया है। यहां तालाबों के निर्माण और पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन को प्राथमिकता दी गई। मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास विभाग के प्रयासों से छोटे-बड़े तालाब बनाए गए, जिससे वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई। किसानों ने अब सिंचित खेती शुरू कर दी है और तीन फसलें लेकर उत्पादन व आय दोनों में वृद्धि की है। साथ ही मछली पालन, मोती उत्पादन और सिंघाड़ा जैसी गतिविधियों से आय के नए स्रोत भी विकसित हुए हैं।

ग्वालियर: पृथ्वी ताल का कायाकल्प और पर्यटन विकास ग्वालियर जिले में ऐतिहासिक पृथ्वी ताल का पुनर्जीवन अभियान की बड़ी उपलब्धि रहा। पहले गाद और अतिक्रमण से प्रभावित यह तालाब अब आधुनिक और आकर्षक जलाशय के रूप में विकसित हो चुका है। गहरीकरण और सफाई कार्यों से इसकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ी है। निकाली गई उपजाऊ मिट्टी का उपयोग खेतों में किया गया, जिससे कृषि को लाभ मिला। आज यह स्थल नागरिकों के लिए पिकनिक स्पॉट और स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। यहां 120 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां और जलीय जीवों की उपस्थिति ने इसे जीवंत पारिस्थितिक तंत्र बना दिया है।

मंदसौर: थडोद की ऐतिहासिक बावड़ी का पुनरुद्धार मंदसौर जिले के ग्राम थडोद में प्राचीन बावड़ी का जीर्णोद्धार अभियान की प्रेरणादायक उपलब्धि है। वर्षों से उपेक्षित यह बावड़ी अब स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोत के रूप में पुनः स्थापित हुई है। प्रशासन और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से श्रमदान कर मलबा हटाया गया और जल स्रोत को पुनर्जीवित किया गया। इससे ग्रामवासियों को स्थायी जल स्रोत मिला है और भू-जल स्तर में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं।

सतत विकास की दिशा में कदम छिंदवाड़ा, ग्वालियर और मंदसौर के उदाहरण यह दर्शाते हैं कि योजनाबद्ध क्रियान्वयन और जनसहभागिता से स्थायी परिणाम संभव हैं। यह अभियान वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव तैयार कर रहा है और प्रदेश में संतुलित विकास को गति दे रहा है।

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