नई दिल्ली, 20 अप्रैल।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में भारतीय रेल के 2022 और 2023 बैच के परिवीक्षाधीन अधिकारियों तथा केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के 2021, 2022, 2023 और 2024 बैच के सहायक कार्यकारी अभियंताओं से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे ऐसे समय में सार्वजनिक सेवा में प्रवेश कर रहे हैं, जब देश ‘विकसित भारत’ के साझा लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है।
राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि भारतीय रेल और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा के सदस्य के रूप में वे ऐसी जिम्मेदारियों में कदम रख रहे हैं, जिनका सीधा असर करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके कार्यों का प्रभाव लोगों के जीवन स्तर पर दीर्घकालिक और व्यापक रूप से दिखाई देगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी भी आधुनिक राष्ट्र की मजबूत नींव होता है। उन्होंने कहा कि रेलवे और सड़कें केवल परिवहन के साधन नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय एकता के प्रमुख माध्यम भी हैं। जब कोई ट्रेन दूरस्थ गांव तक पहुंचती है या कोई राजमार्ग किसी पिछड़े क्षेत्र को जोड़ता है, तो वहां विकास की नई संभावनाएं खुलती हैं।
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि मजबूत आधारभूत संरचना लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने, व्यापार को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और उत्पादकता में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही यह विभिन्न क्षेत्रों और लोगों को करीब लाकर राष्ट्रीय एकता को भी सुदृढ़ करती है।
उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि सफलता का आकलन केवल आंकड़ों से नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह देखना अधिक महत्वपूर्ण है कि उनके कार्यों से लोगों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने ईमानदारी, जवाबदेही और उत्कृष्टता के मूल्यों को बनाए रखने की अपील की और कहा कि कठिन परिस्थितियों में यही मूल्य उनका मार्गदर्शन करेंगे।
राष्ट्रपति ने निरंतर सीखने और नवाचार को अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी जिज्ञासु बने रहें, सीखते रहें और अपने कार्यों में नवीनता को स्थान दें। उन्होंने कहा कि उनके निर्णय, कार्यशैली और समर्पण देश के विकास पर स्थायी छाप छोड़ेंगे। अंत में उन्होंने कहा कि वे केवल प्रशासक नहीं, बल्कि प्रगति के संवाहक और जनता के विश्वास के संरक्षक हैं।







