कोलकाता, 20 अप्रैल।
मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हुई हिंसा मामले में आरोपितों को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है। एजेंसी ने सोमवार को न्यायमूर्ति अरिजीत बंद्योपाध्याय और न्यायमूर्ति अपूर्व सिंह राय की खंडपीठ में अपील दाखिल की, जिस पर अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है।
एनआईए ने अदालत में कहा कि बेलडांगा हिंसा मामले में यूएपीए की धारा 15 लागू होती है या नहीं, इसकी जांच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर जारी है, लेकिन इससे पहले ही निचली अदालत ने 15 आरोपितों को जमानत दे दी। इसी आधार पर एजेंसी ने जमानत आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति बंद्योपाध्याय ने कहा कि यदि एनआईए पर्याप्त कारण प्रस्तुत करती है, तो जमानत रद्द किए जाने पर विचार किया जा सकता है।
इससे पहले भी इस हिंसा को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसे विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी दाखिल किया था। उस समय अदालत ने कहा था कि केंद्र सरकार चाहे तो जांच एनआईए को सौंप सकती है और राज्य सरकार आवश्यकतानुसार केंद्रीय बल की मांग कर सकती है।
बाद में राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। वहां शीर्ष अदालत ने कहा कि एनआईए पहले ही जांच कर रही है और प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, लेकिन यूएपीए लागू होने पर अभी कोई अंतिम राय नहीं दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को निर्देश दिया था कि वह अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उच्च न्यायालय में बंद लिफाफे में प्रस्तुत करे और बताए कि क्या मामले में कानून लागू करने योग्य सामग्री मौजूद है। हालांकि यह रिपोर्ट अभी तक दाखिल नहीं हुई है।
घटना की पृष्ठभूमि में बताया गया कि जनवरी में झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की मौत के बाद बेलडांगा में तनाव बढ़ा था, जिसके बाद कई चरणों में हिंसा, तोड़फोड़, सड़क और रेल जाम तथा प्रदर्शन हुए थे। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा था।
बाद में राज्य पुलिस ने जांच शुरू कर कई लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश पर जांच एनआईए को सौंप दी गई। इसके बाद एजेंसी और राज्य पुलिस के बीच दस्तावेजों के हस्तांतरण को लेकर भी विवाद सामने आया।



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