नई दिल्ली, 21 अप्रैल।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सोशल मीडिया मंच पर एक सुभाषित साझा करते हुए सिविल सेवकों को उनके कर्तव्यों और मूल्यों की पुनः स्मृति कराई। उन्होंने कहा कि सच्ची विद्या का सार उत्तम चरित्र, परोपकार की भावना, अहंकार रहित स्वभाव, क्षमा, धैर्य तथा लोभ से दूरी जैसे गुणों में निहित होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यही गुण एक आदर्श सिविल सेवक की पहचान होते हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर राष्ट्र को प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने सिविल सेवकों से जनसेवा को सर्वोपरि रखते हुए प्रत्येक नागरिक तक विकास का लाभ पहुंचाने के संकल्प को दृढ़ करने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी कहा कि सिविल सेवा दिवस सुशासन को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री ने सिविल सेवकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयास जमीनी स्तर से लेकर नीति निर्माण तक लाखों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि देश के सिविल सेवक कर्तव्यनिष्ठा, उत्कृष्टता, करुणा और नवाचार के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे और सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखेंगे।










