नई दिल्ली, 22 अप्रैल।
पश्चिम एशिया में बने तनावपूर्ण हालात के चलते कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर टिकी हुई हैं। ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम करीब 100 डॉलर के आसपास बने हुए हैं।
बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार के दौरान वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखाई दिया। बीते दो दिनों में इसमें करीब 10 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का भाव भी लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और लगातार सामने आ रही तनाव भरी खबरों के कारण तेल बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन असली चिंता आपूर्ति को लेकर है। उनका कहना है कि जब तक सप्लाई की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक कीमतों में स्थिरता आना मुश्किल रहेगा।
जानकारों के अनुसार, तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे अहम क्षेत्र होर्मुज स्ट्रेट बना हुआ है। जब तक इस इलाके में हालात सामान्य नहीं होते और कोई ठोस शांति समझौता सामने नहीं आता, तब तक तेल के दाम ऊंचे बने रह सकते हैं, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के शुरुआती चरण में कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। इसके बाद कई बार युद्धविराम की घोषणा और उसकी अवधि बढ़ने से कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन आपूर्ति में कमी की स्थिति अभी भी बरकरार है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।







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