हुगली, 31 मार्च।
पश्चिम बंगाल की जंगीपाड़ा विधानसभा सीट इस चुनावी माहौल में बहुकोणीय और दिलचस्प मुकाबलों का केंद्र बनी हुई है। श्रीरामपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सीट लंबे समय तक वामपंथियों का गढ़ रही, लेकिन 2011 के बाद से तृणमूल कांग्रेस ने अपनी मजबूत पकड़ स्थापित कर ली है। पिछले करीब 15 वर्षों से स्नेहाशीष चक्रवर्ती इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिससे उनका संगठनात्मक और प्रशासनिक प्रभाव गहरा माना जाता है।
इस बार भाजपा उम्मीदवार प्रसेनजीत बाग की प्रवेश ने चुनावी समीकरणों में नया मोड़ डाल दिया है। साधारण परिवार से आने वाले बाग, जो आज भी मिट्टी के घर में रहते हैं, अपनी सादगी और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व के कारण ग्रामीण मतदाताओं में खास पहचान बना रहे हैं। बारहवीं पास बाग ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अनुभव और भाजपा संगठन में मजबूत पकड़ के साथ पहले भी इस सीट पर चुनाव लड़ चुका है। भाजपा उन्हें ‘आम आदमी की पहचान’ के रूप में प्रचारित कर रही है।
वहीं तृणमूल कांग्रेस के स्नेहाशीष चक्रवर्ती इस क्षेत्र में अनुभव और प्रशासनिक क्षमता के प्रतीक हैं। स्नातकोत्तर डिग्रीधारी और पूर्व परिवहन मंत्री चक्रवर्ती का अनुभव और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में योगदान पार्टी की मुख्य ताकत के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि स्थानीय स्तर पर कनेक्टिविटी और परिवहन सेवाओं में असंतोष भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस ने इस बार अधिवक्ता शुभाशीष दत्ता को मैदान में उतारा है। पेशे से वकील और शिक्षित छवि के साथ दत्ता का मुकाबला क्षेत्र के पेशेवर और शहरी मतदाताओं के लिए आकर्षक माना जा रहा है। वहीं माकपा ने सुदीप्तो सरकार को उम्मीदवार बनाया है, जिनके पास इंडियन सेक्युलर फ्रंट का समर्थन है। इससे अल्पसंख्यक वोटों में बंटवारा और चुनावी समीकरण जटिल हो गया है।
जंगीपाड़ा का सामाजिक ताना-बाना भी इस चुनाव को विशेष बनाता है। मुस्लिम मतदाता, ओबीसी और अनुसूचित जाति समुदाय निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में कृषि, छोटे व्यापार और दिहाड़ी मजदूरी मुख्य आजीविका हैं। विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला फुरफुरा शरीफ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र है, जो अल्पसंख्यक मतदाताओं पर गहरा प्रभाव डालता है।
स्थानीय मुद्दों में कनेक्टिविटी सबसे बड़ा चुनावी विषय है। लोग आरोप लगाते हैं कि परिवहन मंत्री रहने के बावजूद बस सेवाओं और सड़क संपर्क में सुधार अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ। कई बस रूट बंद होने से ग्रामीण इलाकों में आवाजाही मुश्किल हुई और रोजगार व शिक्षा पर भी असर पड़ा।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंता का विषय है। जंगीपाड़ा अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं का अभाव स्थानीय लोगों में असंतोष पैदा कर रहा है। कई मरीज बेहतर इलाज के लिए दूर शहरों का रुख करते हैं, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
युवा मतदाता रोजगार को मुख्य मुद्दा मान रहे हैं। स्थानीय उद्योगों और अवसरों की कमी के कारण कई युवाओं को बाहर काम की तलाश करनी पड़ती है। ग्रामीण मतदाता परिवहन और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं।
कुल मिलाकर जंगीपाड़ा विधानसभा सीट का यह मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं बल्कि दो अलग छवियों—अनुभव और सादगी—के बीच सीधी टक्कर बन गया है। यह देखना अब अहम होगा कि मतदाता लंबे समय से स्थापित नेतृत्व पर भरोसा करते हैं या जमीन से जुड़े उम्मीदवार को मौका देते हैं।












