नियोक्ता द्वारा विधिवत अभिलेख न रखने के आधार पर हायर पेंशन अमान्य नहीं की जा सकती।
1 अप्रैल।
बम्बई उच्च न्यायालय की एकल पीठ, न्यायमूर्ति अमित बोरकर ने करण राजाराम जाधव बनाम कर्मचारी भविष्य निधि संगठन एवं अन्य की याचिका में निर्णय दिया है कि नियोक्ता द्वारा याचिकाकर्ता के विधिवत अभिलेख नहीं रखने के आधार पर कर्मचारी की हायर पेंशन को अमान्य नहीं किया जा सकता।
याचिका के तथ्यों के अनुसार, याचिकाकर्ता 31 जनवरी 2024 को 37 वर्ष पश्चात एच. बी. फार्मासिटीकल कॉर्पोरेशन से विधिवत सेवानिवृत्त हुआ था। उसके द्वारा कर्मचारी पेंशन स्कीम 1995 के अनुसार हायर पेंशन के लिए आवेदन दिया गया, जिसमें उपलब्ध अभिलेख प्रस्तुत किए गए। परन्तु कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने नियोक्ता द्वारा विधिवत अभिलेख, फॉर्म 6-ए के चालान उपलब्ध न कराने के आधार पर हायर पेंशन का आवेदन 28 मार्च 2025 को निरस्त कर दिया।
याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय, बम्बई में हायर पेंशन अमान्य करने को चुनौती दी और अपनी 37 वर्ष की लगातार सेवा का अभिलेख प्रस्तुत किया। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने बचाव करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के नियोक्ता ने विधिवत अभिलेख का सत्यापन नहीं कराया तथा फॉर्म 6-ए के चालान उपलब्ध नहीं कराए, इसलिए हायर पेंशन स्वीकार नहीं की जा सकती।
उच्च न्यायालय ने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ता कर्मचारी ने नियोक्ता के नियोजन के 37 वर्ष के अभिलेख प्रस्तुत किए हैं, अंशदान खाते का विवरण तथा फॉर्म 3-ए भी प्रस्तुत किया है। न्यायमूर्ति अमित बोरकर ने कहा कि कर्मचारी अपनी ड्यूटी करता है और नियमित वेतन प्राप्त करता है, जबकि अभिलेख रखना नियोक्ता का कार्य है। यदि नियोक्ता द्वारा विधिवत अभिलेख नहीं रखे जाते हैं, तो उसके कारण कर्मचारी को लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। कर्मचारी भविष्य निधि योजना सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण का विधान है, इसलिए सारा प्रमाण भार केवल याचिकाकर्ता पर नहीं डाला जा सकता।
उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने समुचित अभिलेख प्रस्तुत किए हैं, जिनसे 37 वर्ष की सेवा प्रमाणित होती है। इसलिए याचिका स्वीकार करते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को निर्देश दिए गए कि याचिकाकर्ता के प्रकरण में पुनः जांच की जाए तथा नियोक्ता से भी अभिलेख प्राप्त कर 8 सप्ताह में हायर पेंशन का निर्धारण किया जाए।
याचिका स्वीकार की गई।