पानीपत, 03 अप्रैल।
हरियाणा के पानीपत में 28 साल पुराने मिलावटी मसाले बेचने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सजा को पहले से काटी गई अवधि तक सीमित कर दिया है, लेकिन जुर्माने की राशि को बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है।
यह मामला 15 अप्रैल 1998 का है, जब खाद्य निरीक्षक केके शर्मा ने सतीश कुमार की दुकान से 600 ग्राम मिर्ची पाउडर का सैंपल लिया था। लैब रिपोर्ट में यह सैंपल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया और प्रिवेंशन ऑफ फूड अडल्ट्रेशन एक्ट (जो बाद में 2006 में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट से रिप्लेस हुआ) के तहत अपराध सिद्ध हुआ।
पानीपत की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने 14 अगस्त 2007 को सतीश कुमार को दोषी ठहराते हुए छह माह का कठोर कारावास और एक हजार रुपए जुर्माना सुनाया था। इसके बाद 29 सितंबर 2008 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने भी इस सजा को बरकरार रखा।
सतीश कुमार ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत की कोर्ट ने कई पहलुओं पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि यह घटना 1998 की है और दोषी पिछले 28 वर्षों से मुकदमे का सामना कर रहा है। इसके अलावा दोषी ने नए अपराध नहीं किए और मुकदमे के दौरान 24 दिन जेल में भी काट चुके हैं। उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
हाईकोर्ट ने सजा को पहले से काटी गई जेल अवधि तक सीमित कर दिया, लेकिन समाज और अपराध की गंभीरता को देखते हुए जुर्माने की राशि को एक हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया। अदालत ने निर्देश दिए कि यह राशि जजमेंट की सत्यापित कॉपी मिलने के एक माह के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में जमा कराई जाए। यदि दोषी जुर्माना जमा नहीं करते हैं, तो राहत रद्द कर दी जाएगी और छह माह की जेल पूरी तरह काटनी होगी।


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