बिलासपुर/रायपुर, 02 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ के रामावतार जग्गी हत्याकांड में 22 साल बाद उच्च न्यायालय ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी को बड़ा झटका दिया है। उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को निचली अदालत के बरी करने के फैसले को रद्द कर तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
इस मामले की जांच करने वाली सीबीआई ने कोर्ट में 11 हजार पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अमित जोगी पर चार्ज लगाए गए और अंतिम सुनवाई के बाद उन्हें दोषी माना गया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद वर्मा की विशेष खंडपीठ ने सीबीआई की अपील पर यह फैसला दिया। फैसले के बाद अमित जोगी ने इसे अपने साथ "गंभीर अन्याय" बताया और उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही।
रामावतार जग्गी हत्याकांड की घटना 4 जून 2003 की है, जब जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह घटना पूरे राज्य में सनसनी फैल गई थी। जग्गी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और कोषाध्यक्ष थे। 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
इस मामले में कुल 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बने। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की थी, जिसे स्टे मिला और बाद में उच्चतम न्यायालय ने केस को उच्च न्यायालय भेजा।
रामावतार जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए और उन्हें छत्तीसगढ़ में एनसीपी का कोषाध्यक्ष बनाया गया।
जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए।
अमित जोगी के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता और कानूनी टीम मौजूद रही। सीबीआई के पक्ष में अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन ने दलीलें रखीं। सतीश जग्गी की ओर से अधिवक्ता बी. पी. शर्मा और छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल डॉ. सौरभ पांडे व अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रमोद कुमार वर्मा ने पक्ष रखा।











