मंडी, 30 मार्च।
संगीत और साहित्य को समर्पित संस्था संगीत सदन ने मंडी में वरिष्ठ गीतकार और लोक-साहित्य के मर्मज्ञ केआर पंछी का 90वां जन्मदिन बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया। खत्री सभा भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में सेवानिवृत्त सेशन जज तेजेंद्र नाथ वैद्य और विशिष्ट अतिथि के रूप में खत्री सभा अध्यक्ष डॉ. नरेश वैद्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान मंडी, सुंदरनगर और कुल्लू के साहित्यिक और संगीत प्रेमियों ने केआर पंछी के पहाड़ी गीतों और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें सम्मानित किया और उनके दीर्घायु जीवन की कामना की। जन्मदिन के अवसर पर विशेष रूप से तैयार केक काटकर उनके स्वस्थ जीवन और लंबी उम्र की कामना की गई।
संगीत सदन मंडी के संचालक उमेश भारद्वाज ने बताया कि केआर पंछी ने अपनी सभी रचनाओं को मंच पर प्रस्तुत करने और संरक्षित करने का अधिकार संगीत सदन को सौंपा है। इसी वजह से हर वर्ष उनके जन्मदिन पर संस्था ने पारंपरिक रूप से सांगीतिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना शुरू किया है।
पेशे से शिक्षक रहे केआर पंछी का जन्म 29 मार्च 1936 को कुल्लू जिले के ऐतिहासिक गांव मंगलौर में हुआ। उन्होंने कुलवी, डोगरी, मंडयाली, कांगड़ी और चम्बयाली बोलियों में 250 से अधिक गीत रचकर उन्हें संगीतबद्ध किया। उनके गीतों में प्रदेश की विविध बोलियों और लोक संस्कृति की झलक दिखाई देती है, साथ ही उनकी रचनाओं में प्रेम और संगीत की मधुरता स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है।
कार्यक्रम में उनके द्वारा लिखे गए बारामासा गीतों और अन्य लोकप्रिय गीतों का स्थानीय कलाकारों ने स्वरबद्ध गायन प्रस्तुत किया। गीतों जैसे ‘हो जिणे जो मेरे यार क्या चाहिदा’, ‘थोड़ा पाणी, थोड़ी हवा, थोड़ा प्यार चाहिदा’ और ‘अपनणी नज़रा रे तीरा रा निशाना बणाई दे’ आदि ने खत्री सभा भवन को संगीत की मधुरता से भर दिया।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार गंगाराम राजी, रत्तन लाल और सुरेंद्र मिश्रा ने केआर पंछी को शाल-टोपी भेंट कर सम्मानित किया। इसके अलावा संगीत कोकिला शुक्ला शर्मा, धर्मसभा के प्रधान, वीरमंडल अध्यक्ष चंद्रशेखर, ओल्ड बॉयज बैंड के सदस्य और कुल्लू से आए संगीतज्ञ विद्यासागर, जीवन और संजय सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
केआर पंछी की बेटी और दामाद ने भी इस अवसर पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। संगीत सदन के संचालक उमेश भारद्वाज और ईशा डोगरा ने कहा कि केआर पंछी न केवल महान रचनाकार हैं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं और उनका जीवन तथा कृतित्व भविष्य में साहित्य और संगीत जगत को दिशा प्रदान करता रहेगा।











