शिमला, 30 मार्च।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को दोपहर 2 बजे बजट सत्र की 10वीं बैठक आयोजित होगी, जिसमें वित्त वर्ष 2026–27 का 54,928 करोड़ रुपये का बजट पारित करना प्रमुख कार्य रहेगा। रविवार के अवकाश के बाद शुरू हो रही बैठक में प्रश्नकाल के साथ-साथ कटौती प्रस्तावों पर चर्चा और अन्य विधायी कार्यों को भी निपटाया जाएगा।
इस बजट को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 21 मार्च को सदन में पेश किया था। इस वर्ष का बजट पिछले साल के मुकाबले लगभग 3 हजार करोड़ रुपये कम है। राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार ने कुछ कठोर निर्णय भी लिए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में छह महीने के लिए 3 से 50 प्रतिशत तक की कटौती शामिल है।
बजट अनुमान के अनुसार राज्य के हर 100 रुपये में से लगभग 20 रुपये ही विकास कार्यों पर खर्च होंगे, जबकि शेष राशि वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और अन्य देनदारियों में जाएगी। इसके बावजूद सरकार ने कुछ वर्गों को राहत देने की कोशिश की है। दिहाड़ी मजदूरों की मजदूरी में 25 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों के वेतन में अधिकतम 20 हजार रुपये तक वृद्धि का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में भी इजाफा किया गया है।
सरकार ने बजट में 11 नई योजनाओं की भी घोषणा की है। बजट पारित होने के बाद इन योजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे, जिससे घोषणाओं का क्रियान्वयन जमीन पर हो सके।
बैठक में प्रश्नकाल के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। विधायक भुवनेश्वर गौड़ के सवाल पर मुख्यमंत्री ब्यास नदी में ड्रेजिंग से संबंधित मामलों पर जवाब देंगे। इसके अलावा प्रदेश में चल रहे नशा निवारण केंद्रों और राज्य चयन आयोग के परीक्षा केंद्रों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार होगा।
विधायक हरदीप बाबा सदन में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की दस साल या उससे अधिक सेवा अवधि पूरी करने के बाद उन्हें नियमित करने के स्थायी नीति बनाने का मामला उठाएंगे, जिस पर सरकार का रुख स्पष्ट होने की संभावना है।
साथ ही विपक्ष द्वारा प्रस्तुत कटौती प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा होगी। इसके बाद सरकार इन प्रस्तावों का जवाब देगी और अंततः बजट को सदन की मंजूरी मिल जाएगी। बजट पारित होने के साथ ही सरकार की वित्तीय प्राथमिकताएं और आगामी वर्ष के विकास दिशा की रूपरेखा स्पष्ट हो जाएगी।












