कोलकाता, 19 मार्च।
नंदीग्राम विधानसभा सीट, पश्चिम बंगाल की राजनीति की सबसे चर्चित और संवेदनशील सीटों में शुमार है, और 2026 के विधानसभा चुनाव में इसका दंगल फिर से दिलचस्प होने वाला है। 2021 के चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपने ही पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। तब शुभेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। इस बार भाजपा ने शुभेंदु को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जबकि ममता बनर्जी यहां चुनाव नहीं लड़ रही हैं। उनके मुकाबले में भाजपा के पूर्व सहयोगी पवित्र कर को तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है, जो उसी दिन पार्टी में शामिल हुए।
नंदीग्राम तामलुक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और इसमें नंदीग्राम-1 तथा नंदीग्राम-2 विकासखंड शामिल हैं। वर्ष 1951 से 1967 तक यह क्षेत्र नंदीग्राम उत्तर और दक्षिण के रूप में दो विधानसभा क्षेत्रों में बंटा था, लेकिन 1967 में दोनों का विलय कर वर्तमान विधानसभा सीट बनाई गई।
नंदीग्राम का नाम आते ही 2007 का भूमि आंदोलन याद आता है। तत्कालीन वाममोर्चा सरकार द्वारा प्रस्तावित रासायनिक केंद्र के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हुए 14 ग्रामीणों की मौत हुई थी। इस आंदोलन ने ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्थान में अहम भूमिका निभाई और 2011 में वाममोर्चा सरकार को सत्ता से बाहर किया।
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट छोड़कर नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। उनका मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से हुआ, जो तब भाजपा में शामिल हो चुके थे। अत्यंत कड़े मुकाबले में ममता बनर्जी को मात्र 1,956 मतों से हार का सामना करना पड़ा, और भाजपा ने पहली बार इस सीट पर कब्जा जमाया।
2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को नंदीग्राम क्षेत्र में बढ़त मिली, तृणमूल कांग्रेस पर 8,200 मतों की बढ़त दर्ज की। अब यह सीट भाजपा के लिए और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब तक नंदीग्राम में 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 2009 का उपचुनाव भी शामिल है। शुरुआती वर्षों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रभाव रहा, जबकि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने दो-दो बार जीत दर्ज की।

मतदाता संरचना के अनुसार 2016 में कुल मतदाता 2,31,866 थे, 2019 में बढ़कर 2,46,434 हुए और 2021 में 2,57,992 मतदाता दर्ज किए गए। मुस्लिम मतदाता लगभग 23.60 प्रतिशत हैं, अनुसूचित जाति के 16.46 प्रतिशत और ग्रामीण मतदाता 96.65 प्रतिशत हैं। 2021 में यहां 88.51 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो राज्य में सबसे अधिक है।
नंदीग्राम की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। हल्दी नदी के दक्षिणी किनारे स्थित यह क्षेत्र धान, सब्जी और मछली उत्पादन में प्रमुख है। हल्दिया जैसे औद्योगिक शहरों को ताजा सब्जियां और कृषि उत्पाद उपलब्ध कराता है। हालांकि औद्योगिक विकास सीमित है, लेकिन कृषि और छोटे व्यापार ही स्थानीय अर्थव्यवस्था की मुख्य आधारशिला हैं।
सड़क संपर्क बेहतर है और महिषादल रेलवे स्टेशन 19 किलोमीटर दूर है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लोग हल्दिया और तामलुक पर निर्भर हैं। यह क्षेत्र कोलकाता से लगभग 70 किलोमीटर, तामलुक से 33 किलोमीटर और हल्दिया से 13 किलोमीटर दूर स्थित है।
2026 में नंदीग्राम का चुनाव 23 अप्रैल को होगा। भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जबकि तृणमूल ने पवित्र कर को मैदान में उतारा है। जिस दिन तृणमूल ने उम्मीदवारों की सूची जारी की, उसी दिन पवित्र कर भाजपा छोड़कर तृणमूल में शामिल हुए।
ममता बनर्जी का चुनाव न लड़ना भाजपा के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है। शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि ममता पिछली हार के कारण चुनाव नहीं लड़ रही हैं और पार्टी नंदीग्राम में जीत के लिए आश्वस्त है। तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी संगठन के आधार पर चुनाव लड़ रही है और हर सीट पर मजबूत मुकाबला करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पिछली हार के कारण शुभेंदु अधिकारी का कद नंदीग्राम में काफी बढ़ गया है। वहीं सत्तारूढ़ दल भी इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर पूरी ताकत लगा सकता है। इस प्रकार 2026 का नंदीग्राम चुनाव फिर राज्य की राजनीति का सबसे चर्चित और दिलचस्प मुकाबला बनने जा रहा है, जिसका परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी असर डालेगा।












