संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक में नेपाल और बांग्लादेश के लिए समयसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इससे पहले 21 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक परिषद ने नेपाल को अतिरिक्त समय देने की सिफारिश की थी। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में नेपाल के स्थायी मिशन ने इसकी जानकारी दी।
नेपाल को पहले नवंबर 2021 तक अतिकम विकसित देशों की सूची से बाहर होना था। कोरोना महामारी के प्रभाव और निर्धारित समय में आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण संयुक्त राष्ट्र ने पांच साल की मोहलत देकर 24 नवंबर 2026 तक का समय दिया था। अब इस अवधि को तीन साल और बढ़ा दिया गया है।
नेपाल इस अतिरिक्त समय का उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, संस्थागत ढांचे को मजबूत करने और आर्थिक-सामाजिक बदलाव को गति देने में करेगा। साथ ही विकासशील देश बनने के बाद सुचारु बदलाव के लिए तैयार रणनीति, सतत विकास के 2030 एजेंडे और दोहा कार्ययोजना के क्रियान्वयन पर जोर दिया जाएगा।
तीन मानदंड पूरे, फिर भी बढ़ी समयसीमा
संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित मानदंडों के अनुसार अतिकम विकसित देशों की श्रेणी से बाहर निकलने के लिए प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय कम से कम 1306 डॉलर, मानव संपत्ति सूचकांक 66 या उससे अधिक और आर्थिक एवं पर्यावरणीय जोखिम सूचकांक 32 या उससे कम होना चाहिए।
नेपाल की प्रति व्यक्ति आय 1535 डॉलर, मानव संपत्ति सूचकांक 77.58 और आर्थिक एवं पर्यावरणीय जोखिम सूचकांक लगभग 29 है। इस तरह नेपाल निर्धारित मानदंड पूरे कर चुका है। हालांकि, अगस्त 2025 के जेन-जी आंदोलन और प्राकृतिक आपदाओं के बाद राजनीतिक व आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं। इसलिए नेपाल ने स्तरोन्नति की प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
स्तरोन्नति के बाद चुनौतियां
विकासशील देश बनने के बाद नेपाल को व्यापार में मिलने वाली कुछ सुविधाएं समाप्त होने, अनुदान प्राप्त करने में कठिनाई और ऋण पर अधिक ब्याज जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इन परिस्थितियों में देश के दोबारा अतिकम विकसित देशों की श्रेणी में आने का जोखिम भी जताया गया है। विशेषज्ञों ने सुचारु और टिकाऊ स्तरोन्नति के लिए समयसीमा बढ़ाने के फैसले को स्वागतयोग्य बताया है।















