नई दिल्ली, 31 अक्टूबर।
भारत में सामाजिक सुरक्षा का दायरा पिछले एक दशक में ऐतिहासिक रूप से बढ़ा है। वर्ष 2015 में जहां महज 19 प्रतिशत आबादी इस सुरक्षा कवच के दायरे में थी, वहीं अब विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल सुधारों के चलते यह आंकड़ा बढ़कर 68.4 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
सरकार के इन प्रयासों से देश के एक अरब से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा का सीधा लाभ मिल रहा है। इस व्यापक विस्तार का मुख्य उद्देश्य संगठित व असंगठित क्षेत्र के कामगारों, गिग वर्कर्स और बुजुर्गों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करना है।
बदलती अर्थव्यवस्था के इस दौर में औपचारिक और अनौपचारिक रोजगार के तरीकों में आए बदलावों के बीच श्रमिकों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। इस पूरी व्यवस्था में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ एक रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य कर रहा है।
ईपीएफओ के तहत संचालित होने वाली मुख्य रूप से तीन योजनाएं—कर्मचारी भविष्य निधि, पेंशन योजना और बीमा योजना—श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित करती हैं। इसके माध्यम से सेवानिवृत्ति के लिए बचत के साथ-साथ आपातकालीन स्थिति में आंशिक निकासी की सुविधा भी मिलती है।
संगठन का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है और ईपीएफओ के सक्रिय सदस्यों की संख्या बढ़कर लगभग 7.98 करोड़ हो गई है। इसके साथ ही देश भर में पेंशन प्राप्त करने वाले नागरिकों का आंकड़ा भी बढ़कर लगभग 82 लाख तक पहुंच चुका है।
कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने ईपीएफओ के अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है। इस महत्वपूर्ण बदलाव से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
दावों के निपटान की प्रक्रिया को भी बेहद सरल और पारदर्शी बनाया गया है। अब पात्र अग्रिम दावों के लिए ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के तुरंत राहत मिलती है।
ईपीएफओ ने आंशिक निकासी के नियमों को आसान करते हुए इसे तीन श्रेणियों में समेकित किया है। अब सदस्य शिक्षा, विवाह और चिकित्सा जैसी जरूरतों के लिए आसानी से अपने पीएफ खाते से पैसे निकाल सकते हैं।
संगठन ने तकनीकी का उपयोग बढ़ाते हुए डिजिटल सेवाओं का भी व्यापक विस्तार किया है। उमंग एप और नई आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अब घर बैठे ही यूएएन जनरेशन, पासबुक देखने और दावों की स्थिति जानने जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं।
वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों की सुविधा के लिए केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली शुरू की गई है, जिससे देश की किसी भी बैंक शाखा से पेंशन पाना आसान हो गया है। इसके अलावा घर पर ही डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था भी की गई है।
केवल ईपीएफओ ही नहीं, बल्कि सरकार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए भी कई बड़े कदम उठाए हैं। ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 31 करोड़ से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण हो चुका है, जिससे उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के कामगारों को वृद्धावस्था में तीन हजार रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान किया गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के जरिए भी श्रम कानूनों को सरल बनाकर व्यापक सुरक्षा दी जा रही है।















