शनिवार को भाजपा मुख्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. पात्रा ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती का उल्लेख करते हुए दावा किया कि देश में वोट चोरी का पहला उदाहरण आजादी के शुरुआती दौर में सामने आया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरदार पटेल के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बने। पात्रा ने इसे देश का पहला अनिर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का उदाहरण बताते हुए नेहरू पर पटेल को उनके अधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया।
13 करोड़ वोट चोरी के दावे पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के वोट चोरी संबंधी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पात्रा ने कहा कि खरगे का दावा है कि 13 करोड़ मतदाताओं के वोट चोरी हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के वोट काटे गए होते तो देश में विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं होते।
उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भर सकते हैं।
मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम शामिल करना जरूरी
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सरकार, विपक्ष और पत्रकारों सहित सभी की जिम्मेदारी है कि मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या घुसपैठियों को देश का मतदाता बनने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, मतदाता सूची पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और सूची को दुरुस्त करना है।
खरगे के फॉर्म-6 में संशोधन के आरोप पर पात्रा ने कहा कि फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि इसके साथ एक घोषणापत्र जोड़ा गया है। उन्होंने 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए दावा किया कि अदालत ने भी फॉर्म में संशोधन और घोषणापत्र जोड़ने के बीच अंतर स्पष्ट किया है।
चुनाव आयोग के फैसले पर भी दी प्रतिक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष के आरोपों पर पात्रा ने कहा कि एसआईआर का निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिया था। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग ने तस्वीर और बयान के माध्यम से इस संबंध में जानकारी दी थी।
पात्रा ने खरगे पर बार-बार गलत बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे दावों से राहुल गांधी के आरोपों को सही साबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्ष से मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखने की अपील की।
















