रायपुर, 30 मार्च।
छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों और वन्यजीव अभयारण्यों में आवारा कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए वन विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। यह कदम अंबिकापुर में हाल ही में हुए एक हादसे के बाद उठाया गया, जिसमें आवारा कुत्तों ने हिरणों को मार डाला।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय ने सोमवार को सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। उनका कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।
सरगुजा वनमंडल के अंबिकापुर स्थित संजय वाटिका में 20-21 मार्च की रात हुई घटना के बाद उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। इस घटना में बाड़े में घुसकर 15 शाकाहारी वन्यप्राणियों की मौत हुई थी।
वन विभाग राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन सुनिश्चित करेगा। इसके लिए अगले दो सप्ताह में अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वन क्षेत्रों के पास रहने वाले गांवों में पालतू कुत्तों को विशेष रंग के कॉलर पहनाए जाएंगे। यदि कोई पालतू कुत्ता वन क्षेत्र में पाया गया, तो उसके मालिक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आवारा कुत्तों को पकड़ने और प्रबंधन के लिए “एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया” (एडब्ल्यूबीआई) के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा, जिससे पशु कल्याण के मानकों का भी ध्यान रखा जाएगा।
वन क्षेत्रों के आसपास जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। पोस्टर, बैनर और ग्राम सभाओं के माध्यम से लोगों को वन्यप्राणियों की सुरक्षा और रैबीज जैसी बीमारियों से बचाव के बारे में जानकारी दी जाएगी।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने सभी वनमंडलाधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रामवार योजना बनाकर समयबद्ध तरीके से इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें।











