शिमला, 28 मार्च।
पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने लिव-इन रिलेशन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और इसे समाज के लिए खतरनाक बताते हुए सख्त कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक निर्णय में लिव-इन रिलेशन को कानूनी मान्यता देते हुए इस पर कार्रवाई न करने की बात कही गई है, जो चिंताजनक है।
शांता कुमार ने कहा कि एक सभ्य समाज में इस प्रकार के संबंध न केवल अनुचित हैं, बल्कि यह सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक व्यवस्था के लिए हानिकारक प्रवृत्ति है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ऐसे संबंध परिवार और समाज दोनों के लिए नुकसानदेह हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि जब कोई व्यक्ति विवाह के बाद अपने परिवार और बच्चों के होते हुए किसी अन्य महिला के साथ अलग रहने लगता है, तो यह स्थिति केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए पीड़ादायक होती है। बच्चों पर इसका नकारात्मक मानसिक प्रभाव पड़ता है और कई परिवार टूटने की कगार पर पहुंच जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में गलत संस्कार फैलाती हैं और सामाजिक ढांचे को कमजोर करती हैं। शांता कुमार ने सभी राज्य सरकारों और समाज से अपील की कि इस विषय पर गंभीरता से विचार कर जल्द से जल्द सख्त कानून बनाए जाएं, ताकि ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाई जा सके।











