लखनऊ, 09 मई।
संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में न्यूरोसर्जरी विभाग ने अत्याधुनिक सी-आर्म नेविगेशन तकनीक के माध्यम से स्पाइन ट्रॉमा उपचार में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। इस तकनीक की मदद से डी-10 कशेरुक फ्रैक्चर से पीड़ित मरीज पर न्यूनतम इनवेसिव स्पाइनल फिक्सेशन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई, जिससे उन्नत ट्रॉमा केयर में एक नया आयाम जुड़ गया है।
यह जटिल सर्जरी एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख तथा न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष के निर्देशन में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा संपन्न की गई। एनेस्थीसिया टीम ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों के अनुसार पिछले कई वर्षों से यहां स्पाइनल ट्रॉमा की न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन नई नेविगेशन तकनीक के आने से सर्जिकल सटीकता और रोगी सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
डॉक्टरों ने बताया कि यह उन्नत प्रणाली सर्जरी के दौरान वास्तविक समय में त्रि-आयामी इमेजिंग उपलब्ध कराती है, जिससे जटिल मामलों में भी इम्प्लांट्स को अधिक सटीकता के साथ स्थापित किया जा सकता है। इसके साथ ही यह तकनीक सर्जरी के दौरान मरीज और मेडिकल टीम दोनों पर रेडिएशन के प्रभाव को भी काफी हद तक कम करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ओ-आर्म और नेविगेशन सिस्टम की स्थापना से ट्रॉमा सेंटर की तकनीकी क्षमता में बड़ा सुधार हुआ है, जिससे अब विश्वस्तरीय स्पाइन देखभाल सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें कम लागत में बेहतर उपचार मिल सकेगा।
चिकित्सकीय टीम ने यह भी बताया कि यह आधुनिक तकनीक ट्रॉमा और स्पाइन उपचार की गुणवत्ता को और मजबूत करेगी तथा गंभीर चोटों के मामलों में त्वरित और प्रभावी इलाज सुनिश्चित करेगी। वहीं संस्थान के निदेशक ने पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।












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