मॉस्को, 09 मई।
रूस की राजधानी मॉस्को के रेड स्क्वायर में शनिवार को द्वितीय विश्व युद्ध में विजय की वर्षगांठ पर आयोजित परेड इस बार पहले की तुलना में काफी सीमित रही। यूक्रेन युद्ध के चलते संभावित हमलों की आशंका के कारण सुरक्षा कारणों से इस आयोजन का स्वरूप छोटा रखा गया। लंबे समय बाद परेड में टैंक और भारी सैन्य उपकरणों की भव्य झलक नहीं दिखाई दी, जो पहले इसकी प्रमुख पहचान हुआ करती थी।
इस बार हथियारों और सैन्य तकनीक का प्रदर्शन जमीन पर करने के बजाय विशाल स्क्रीन के माध्यम से किया गया, जिसमें अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल प्रणाली, परमाणु पनडुब्बी, लेजर हथियार और ड्रोन जैसी आधुनिक सैन्य क्षमताएं दर्शाई गईं। परेड में सैनिकों और नौसैनिकों ने भाग लिया, जिनमें यूक्रेन संघर्ष में शामिल रहे जवान भी शामिल थे। इस दौरान उत्तर कोरिया के सैनिकों की मौजूदगी भी देखी गई। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने परेड का निरीक्षण किया और करीब आठ मिनट के संबोधन में यूक्रेन में जीत का संकल्प दोहराया।

दूसरी ओर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने की अपील की और कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष मानव जीवन के लिहाज से बेहद गंभीर स्थिति बन चुका है। उन्होंने संघर्ष को रोकने और युद्धविराम को लंबा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस बीच दोनों पक्षों के बीच कैदियों की अदला-बदली पर भी सहमति बनी।
द्वितीय विश्व युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को याद करते हुए बताया गया कि 1945 में नाजी जर्मनी की हार के बाद सोवियत संघ ने विजय हासिल की थी, जिसे रूस में 9 मई को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इस बार का उत्सव यूक्रेन युद्ध की छाया में मनाया गया, जिसने रूस की आंतरिक और बाहरी चिंता को और बढ़ा दिया है।
युद्ध के कारण रूस और यूक्रेन दोनों को भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान हुआ है। इस संघर्ष ने रूस की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ाया है और पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि स्थिति में किसी भी बड़े बदलाव से आर्थिक अस्थिरता और गहरी हो सकती है।
सुरक्षा और राजनीतिक हलचल के बीच क्रेमलिन ने तख्तापलट या किसी खतरे की आशंकाओं को खारिज किया है। वहीं, परेड में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत रखा गया।









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