नई दिल्ली, 09 मई
केंद्र सरकार ने देश की सैन्य नेतृत्व व्यवस्था में बड़ा निर्णय लेते हुए सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि को अगला रक्षा प्रमुख नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। वे मौजूदा रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है। इसी दिन वे औपचारिक रूप से कार्यभार संभालेंगे और रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग में सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि इस समय 1 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक सेना के उप प्रमुख रहे और मार्च 2023 से जून 2024 तक केंद्रीय कमान के शीर्ष कमान अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उन्होंने 39 वर्षों की विशिष्ट सैन्य सेवा के बाद 31 जुलाई 2025 को सेना से सेवानिवृत्ति ली थी और केंद्रीय कमान में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
देश में तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए वर्ष 2020 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनाया गया था। इस पद पर पहले जनरल बिपिन रावत नियुक्त हुए थे, जिन्होंने 1 जनवरी 2020 से 8 दिसंबर 2021 तक सेवा दी। केरल के कुन्नूर में हुए एक विमान हादसे में उनके निधन के बाद यह पद कुछ समय तक रिक्त रहा। इसके बाद 30 सितंबर 2022 को जनरल अनिल चौहान को दूसरा रक्षा प्रमुख नियुक्त किया गया।
अब उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि देश के तीसरे रक्षा प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। केंद्र सरकार ने उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपते हुए सैन्य नेतृत्व में निरंतरता और समन्वय को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।
साथ ही केंद्र ने नौसेना नेतृत्व में भी बड़ा बदलाव किया है। वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को देश का अगला नौसेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। वे वर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का स्थान लेंगे, जो 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन इस समय पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत हैं। लगभग चार दशक के लंबे सैन्य करियर में उन्होंने परिचालन, रणनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे नौसेना के उप प्रमुख सहित कई अहम पदों पर रह चुके हैं और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान भी संभाल चुके हैं।
उन्होंने 1 जुलाई 1987 को नौसेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने करियर के शुरुआती वर्षों में विभिन्न युद्धपोतों पर सेवाएं दीं। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण और रणनीतिक पाठ्यक्रमों में भाग लिया। उन्हें निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मैसूर की कमान भी सौंपी गई थी, जिसके दौरान उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में हिस्सा लिया।
अब केंद्र सरकार ने उन्हें देश की नौसेना की कमान सौंपते हुए शीर्ष नेतृत्व में नई जिम्मेदारी दी है।








