नई दिल्ली, 30 मार्च।
कोल इंडिया की सहायक कंपनी सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में कमजोर शुरुआत की और आईपीओ निवेशकों को निराश किया। कंपनी के आईपीओ के तहत शेयर 172 रुपये प्रति शेयर के भाव पर जारी किए गए थे, लेकिन आज बीएसई पर यह 162.80 रुपये और एनएसई पर 160 रुपये के स्तर पर लिस्ट हुए। इस तरह से शेयर ने अपनी शुरुआत ही लगभग सात प्रतिशत डिस्काउंट पर की।
लिस्टिंग के बाद खरीदारी का दबाव आया और शेयर 168.70 रुपये तक उछल गए, लेकिन इसके बाद बिकवाली के दबाव से कीमत दोबारा नीचे आ गई। सुबह 11 बजे तक बीएसई पर सीएमपीडीआई के शेयर 161.55 रुपये और एनएसई पर 161.50 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। इस हिसाब से आईपीओ निवेशकों को छह प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ।
सीएमपीडीआई का 1,842.12 करोड़ रुपये का आईपीओ 20 से 24 मार्च के बीच खुला था। इसे निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला और ओवरऑल 1.05 गुना सब्सक्राइब हुआ। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 3.48 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि नॉन इंस्टीट्यूशनल और रिटेल निवेशकों के लिए सिर्फ 0.35 गुना ही सब्सक्रिप्शन हुआ। एंप्लॉयीज के लिए 0.21 गुना और शेयर होल्डर्स के लिए 0.36 गुना पोर्शन भरा गया। इस आईपीओ के तहत दो रुपये फेस वैल्यू वाले 10.71 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिए बेचे गए।
कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत रही है। वित्त वर्ष 2022-23 में शुद्ध लाभ 296.66 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में बढ़कर 503.23 करोड़ रुपये और 2024-25 में 666.91 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में 425.36 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।
राजस्व में भी लगातार बढ़ोतरी रही। वित्त वर्ष 2022-23 में 1,398.78 करोड़ रुपये, 2023-24 में 1,770.18 करोड़ रुपये और 2024-25 में 2,177.53 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में 1,543.93 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया गया।
कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2022-23 में 1,074.85 करोड़ रुपये, 2023-24 में 1,448.81 करोड़ रुपये और 2024-25 में 1,899.05 करोड़ रुपये कर्ज रहा। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में कर्ज 2,010.98 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
नेटवर्थ में भी सुधार हुआ। वित्त वर्ष 2022-23 में 1,217.65 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में 1,591.61 करोड़ रुपये और 2024-25 में 2,041.85 करोड़ रुपये हो गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में यह 2,153.78 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
ईबीआईटीडीए में भी वृद्धि दर्ज की गई। 2022-23 में 395.65 करोड़ रुपये, 2023-24 में 764.44 करोड़ रुपये और 2024-25 में 915.71 करोड़ रुपये रहा। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में यह 593.85 करोड़ रुपये के स्तर पर था।












