भोपाल, 31 मार्च।
मध्य प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए बड़ा आर्थिक झटका आने वाला है। एक अप्रैल से मकान और जमीन की खरीद पर कलेक्टर गाइडलाइन दरों में औसतन 16 प्रतिशत की वृद्धि लागू होगी। केंद्रीय मूल्यांकन समिति ने जिला स्तर से प्राप्त प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए यह निर्णय लिया है, जिसका असर सीधे रजिस्ट्री प्रक्रिया और स्टांप ड्यूटी पर पड़ेगा।
महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेशभर की गाइडलाइन दरों की समीक्षा की गई। 1.05 लाख लोकेशनों में से 65,300 स्थानों पर दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया गया। इस वृद्धि का निर्धारण पिछले पांच वर्षों के रजिस्ट्री ट्रेंड, स्थानीय बाजार की परिस्थितियों और जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर किया गया है। कलेक्टर गाइडलाइन दरें किसी संपत्ति की न्यूनतम सरकारी कीमत तय करती हैं, जिनके आधार पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क तय होता है।
इस बढ़ोतरी का मतलब है कि अब हर प्रॉपर्टी सौदे में खरीदारों को अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा। इसका असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में होगा, लेकिन तेजी से विकसित शहरों और प्रमुख लोकेशनों पर यह ज्यादा महसूस किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत न केवल जमीन और मकानों की कीमत बढ़ेगी, बल्कि पक्के मकानों के निर्माण की लागत भी संशोधित होकर 1000 रुपये प्रति वर्गमीटर तक कर दी गई है।
निर्माण लागत में वृद्धि से उन संपत्तियों की रजिस्ट्री महंगी होगी, जिनका मूल्यांकन निर्माण लागत के आधार पर होता है। महंगे सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री के बीच यह कदम आम लोगों के लिए घर बनाना कठिन कर सकता है। इस बार प्रीमियम अपार्टमेंट को सामान्य फ्लैट्स से अलग श्रेणी में रखा गया है। जिन अपार्टमेंट में स्विमिंग पूल, क्लब हाउस, जिम और गेमिंग जैसी सुविधाएं हैं, उनकी गाइडलाइन दर सामान्य मल्टीस्टोरी इमारतों की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक निर्धारित की गई है।
इससे लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में निवेश करने वालों को अधिक भुगतान करना होगा। हालांकि सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए राहत दी है। कच्चे मकान और टीन शेड की निर्माण लागत में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे सीमित संसाधनों वाले परिवारों को राहत मिलेगी।
विशेषज्ञ मृणाल शास्त्री का मानना है कि गाइडलाइन दरों में यह बढ़ोतरी रियल एस्टेट बाजार को प्रभावित करेगी। अचानक दरों में वृद्धि के कारण प्रॉपर्टी की मांग में कुछ समय के लिए गिरावट आ सकती है, खासकर मध्यम वर्गीय खरीदारों में। निवेश के उद्देश्य से संपत्ति खरीदने वाले लोग भी अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
सरकार का तर्क है कि यह संशोधन वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप किया गया है। कई क्षेत्रों में लंबे समय से दरों में बदलाव नहीं हुआ था, जिससे सरकारी दर और वास्तविक मूल्य के बीच अंतर बढ़ गया था। इसे खत्म करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। साथ ही, इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होने और विकास कार्यों में गति मिलने की उम्मीद है।










