विज्ञान व प्रौद्योगिकी
27 Apr, 2026

आम नागरिकों के लिए खुला अंतरिक्ष दरवाजा, इसरो का बड़ा फैसला

सरो ने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को विस्तार देते हुए अंतरिक्ष यात्री चयन प्रक्रिया को आम नागरिकों तक खोलने की दिशा में कदम बढ़ाया है जिससे गगनयान सहित भविष्य के मिशनों में नई संभावनाएं विकसित होंगी।

नई दिल्ली, 27 अप्रैल

अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल करते हुए इसरो ने पहली बार अंतरिक्ष यात्री कैडर को आम नागरिकों के लिए खोलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस नई व्यवस्था के बाद भविष्य में गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष मिशनों में सामान्य पृष्ठभूमि के योग्य लोगों को भी शामिल किए जाने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस संबंध में एक समिति ने विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, जिस पर विचार चल रहा है।

समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अब केवल सैन्य पायलट ही नहीं, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित से जुड़े विशेषज्ञ भी अंतरिक्ष यात्री बनने के पात्र होंगे। इसमें वैज्ञानिक, इंजीनियर और चिकित्सक जैसे पेशेवर भी शामिल किए जाएंगे, हालांकि चयन के मानक अभी जारी नहीं किए गए हैं।

प्रस्ताव के अनुसार दूसरे बैच में चार लोगों को शामिल करने की योजना है, जिन्हें सीधे गगनयान मिशन के क्रू मेंबर के रूप में भेजा जा सकता है। यह भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसे वर्ष 2027 तक प्रक्षेपित करने की तैयारी है। यह मिशन लगभग तीन दिन का होगा, जिसमें तीन अंतरिक्ष यात्री लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचकर सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे।

पहले बैच में भारतीय वायु सेना के चार परीक्षण पायलट शामिल किए गए हैं, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, शुभांशु शुक्ला, अजीत कृष्णन और अंगद प्रताप शामिल हैं। दूसरे बैच में सेना के लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलटों को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

समिति के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि एक वर्ष में दो मानव अंतरिक्ष मिशन संचालित किए जा सकते हैं, जिससे प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्रियों को पुनः मिशन में भेजने की प्रक्रिया तेज होगी। चयन से लेकर प्रशिक्षण और मिशन तक की पूरी प्रक्रिया में लगभग पांच वर्ष का समय लगेगा।

आगामी योजना के तहत अंतरिक्ष यात्री दल का विस्तार किया जाएगा। दूसरे बैच में सात और तीसरे बैच में बारह अंतरिक्ष यात्रियों को शामिल करने का अनुमान है। इसके साथ ही कुल मिलाकर लगभग चालीस अंतरिक्ष यात्रियों का स्थायी दल तैयार करने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा अंतरिक्ष यान की क्षमता को दो से बढ़ाकर तीन अंतरिक्ष यात्रियों तक करने की योजना भी बनाई गई है, जो भविष्य की भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस विस्तार का उद्देश्य दीर्घकालिक अंतरिक्ष अनुसंधान, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अध्ययन और वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत करना है। इसरो की यह पहल भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा देने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।

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