दमोह, 08 जून।
मध्य प्रदेश के दमोह जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रक्त की सीमित उपलब्धता एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। अस्पताल में दुर्घटना पीड़ितों, गंभीर मरीजों, प्रसूताओं और थैलेसीमिया व एनीमिया से जूझ रहे रोगियों के लिए प्रतिदिन रक्त की भारी मांग रहती है, लेकिन वर्तमान में संग्रह कम होने के कारण मरीजों के परिजनों को रक्तदाताओं की तलाश करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, ब्लड बैंक पर हमेशा दबाव बना रहता है। विशेषकर दुर्लभ रक्त समूहों (जैसे एबी नेगेटिव और ओ नेगेटिव) की अनुपलब्धता स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। आपातकालीन स्थिति में इन समूहों के रक्तदाताओं को ढूँढना मुश्किल हो जाता है, जिससे उपचार की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस स्थिति को सुधारने के लिए रक्तदान शिविरों में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी को अनिवार्य बताया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन अस्पताल की दैनिक जरूरतों को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है। इस संकट को दूर करने के लिए शहर के सामाजिक संगठन, युवा समूह और स्वयंसेवी संस्थाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से तत्काल रक्तदाताओं तक सूचना पहुँचाकर मरीजों की मदद की जा रही है।
जिला अस्पताल दमोह के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रशांत सोनी ने बताया कि रक्तदान शिविरों के माध्यम से भंडारण बढ़ाने का प्रयास निरंतर जारी है। उन्होंने आम नागरिकों से स्वैच्छिक और नियमित रक्तदान की अपील की है। डॉ. सोनी ने कहा कि एक यूनिट रक्तदान से किसी जरूरतमंद की बहुमूल्य जान बचाई जा सकती है। विभाग अब अधिक रक्तदान शिविर आयोजित करने की योजना बना रहा है, ताकि जागरूकता अभियान के माध्यम से ब्लड बैंक में पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जा सके।












