जकार्ता, 10 जून।
इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में पिछले वर्ष आए विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने गंभीर रूप से संकटग्रस्त तपानुली ओरंगुटान की आबादी को बड़ा झटका पहुंचाया है। एक नए अध्ययन के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में इस दुर्लभ प्रजाति की कुल आबादी का कम से कम सात प्रतिशत हिस्सा समाप्त हो गया।
रिपोर्ट के मुताबिक चक्रवात से प्रभावित बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 1,200 से अधिक लोगों की जान गई थी और लगभग तीन लाख घर क्षतिग्रस्त हुए थे। पर्यावरण समूहों का मानना है कि सुमात्रा में तेजी से हो रही वनों की कटाई ने आपदा के प्रभाव को और अधिक गंभीर बना दिया।
अध्ययन में बताया गया है कि उत्तरी सुमात्रा के बाटांग तोरू वन क्षेत्र में रहने वाले कम से कम 58 तपानुली ओरंगुटान बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आकर मारे गए। यह प्रजाति दुनिया में केवल इसी क्षेत्र में पाई जाती है और इसकी कुल आबादी लगभग 800 मानी जाती है।
शोधकर्ताओं ने उपग्रह चित्रों और पुराने जनसंख्या आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। अध्ययन में यह भी संकेत दिया गया कि मानव गतिविधियों से बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण मलक्का जलडमरूमध्य के आसपास अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ी है, जिससे ओरंगुटान के प्राकृतिक आवास पर खतरा और गहरा गया है।
अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रहा आवास क्षरण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और अवैध शिकार पहले से ही इस प्रजाति के अस्तित्व के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में हालिया नुकसान ने संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता को और अधिक बढ़ा दिया है।
शोधकर्ताओं ने इंडोनेशियाई सरकार, गैर-सरकारी संगठनों और वैज्ञानिक समुदाय से मिलकर इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण के लिए समन्वित और प्रभावी कार्ययोजना लागू करने की अपील की है, ताकि इसकी घटती आबादी को स्थिर किया जा सके।










