रायपुर, 10 जून।
गरियाबंद जिले के राजापड़ाव क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अनोखे तरीके से अपनी आवाज उठाई है। क्षेत्र की आठ ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 48 गांवों के लोगों ने अपनी समस्याओं के समाधान की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखकर भेजे हैं। ग्रामीणों द्वारा 500 से अधिक पत्र स्पीड पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को प्रेषित किए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से बिजली, सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं मिल सका है। उनका आरोप है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष समस्याएं रखने के बावजूद स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।
बुधवार को राजापड़ाव क्षेत्र के विभिन्न गांवों के ग्रामीण अड़गड़ी गौठान में एकत्र हुए। यहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सामूहिक रूप से पत्र तैयार किए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से आवेदन, ज्ञापन और विभिन्न माध्यमों से अपनी बात रखने के बाद भी समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
ग्रामीण प्रतिनिधियों ने बताया कि क्षेत्र उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आता है और विकास कार्यों के लिए विभिन्न स्तरों पर स्वीकृतियों की आवश्यकता बताई जाती रही है। उनका कहना है कि इस कारण कई परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पाई हैं और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार प्रभावित हुआ है।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि उन्हें पूर्व में क्षेत्र के विद्युतीकरण को लेकर आश्वासन मिला था, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दी। उनका कहना है कि कई गांव और आश्रित बस्तियां आज भी आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं।
इस बीच प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं में आ रही बाधाओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों की मांगों और विकास कार्यों से जुड़े विषयों पर आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।











