नई दिल्ली, 10 जून।
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में वर्ष 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री बन चुके हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू के नाम था। यह उपलब्धि केवल समय का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि लगातार तीन आम चुनावों में जनता द्वारा व्यक्त किए गए विश्वास का भी प्रमाण है। इसलिए मोदी युग का मूल्यांकन केवल राजनीतिक सफलता से नहीं, बल्कि भारत में आए व्यापक आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक परिवर्तनों के आधार पर किया जाना चाहिए।
जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत की संस्थागत नींव रखी। लोकतांत्रिक व्यवस्था, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग, वैज्ञानिक संस्थान और आधुनिक विकास मॉडल उनके योगदान रहे। नरेंद्र मोदी का कार्यकाल उसी नींव पर तकनीक, सुशासन, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप नए भारत के निर्माण का प्रयास माना जा सकता है। दोनों नेताओं ने अलग-अलग परिस्थितियों में देश का नेतृत्व किया और अपने समय की चुनौतियों के अनुरूप निर्णय लिए।
मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और तकनीक का समावेश शामिल है। जनधन, आधार और मोबाइल की त्रिवेणी ने करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा और सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंची। डिजिटल इंडिया अभियान और यूपीआई आधारित भुगतान प्रणाली ने भारत को दुनिया की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित किया। सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आम नागरिक के लिए व्यवस्था को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया।
आर्थिक क्षेत्र में मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं ने विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उत्पादन में भारत की क्षमता बढ़ी। स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया ने युवाओं में नवाचार को बढ़ावा दिया। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू कर पूरे देश को एकीकृत कर व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया गया, जिससे "एक राष्ट्र, एक कर" की अवधारणा को बल मिला और व्यापारिक प्रक्रियाओं में सरलता आई। विदेशी निवेश में वृद्धि और विनिर्माण विस्तार ने भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया।
बुनियादी ढांचे का विस्तार मोदी सरकार की सबसे स्पष्ट उपलब्धियों में शामिल है। राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, वंदे भारत ट्रेनों, आधुनिक रेलवे स्टेशनों, नए हवाई अड्डों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक नेटवर्क के विकास ने देश की कनेक्टिविटी को नई गति दी। गांवों तक सड़क, बिजली, गैस, इंटरनेट और पेयजल सुविधाओं का विस्तार हुआ। हर घर जल मिशन और ग्रामीण अवसंरचना में निवेश ने विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया।
सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने करोड़ों परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया। गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा, महिलाओं को स्वच्छ ईंधन, ग्रामीण परिवारों को आवास और किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में व्यापक कार्य हुआ। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया गया। तीन तलाक को समाप्त करने वाला कानून भी महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय माना गया।
मोदी सरकार के कार्यकाल में कई ऐसे फैसले हुए जिनकी लंबे समय से मांग की जा रही थी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर वहां की संवैधानिक व्यवस्था को देश के अन्य राज्यों के समान बनाना ऐतिहासिक निर्णय माना गया। समर्थकों के अनुसार इससे राष्ट्रीय एकीकरण और विकास की नई संभावनाएं खुलीं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण करोड़ों लोगों की आस्था और दशकों पुरानी आकांक्षा की पूर्ति के रूप में देखा गया, जिसने सांस्कृतिक पुनर्जागरण को नई ऊर्जा प्रदान की।
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करना और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की दिशा में पहल भी सरकार के प्रमुख वैचारिक कदमों में शामिल रहे। समर्थकों का मानना है कि इन पहलों का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान नागरिक व्यवस्था की स्थापना है। इन विषयों पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस भी हुई, जो लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज हुईं। सीमा अवसंरचना का तेजी से विकास, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी हथियार निर्माण और रक्षा निर्यात में वृद्धि ने भारत की सामरिक क्षमता को मजबूत किया। चंद्रयान-3 की सफल चंद्र लैंडिंग और आदित्य-एल1 मिशन ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाई। सेमीकंडक्टर मिशन, हरित हाइड्रोजन मिशन और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार ने भविष्य की अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया।
विदेश नीति के क्षेत्र में भारत की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली हुई है। जी-20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, क्वाड में सक्रिय भागीदारी, वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में भारत की भूमिका और कोविड काल में वैक्सीन मैत्री अभियान ने भारत की कूटनीतिक साख को नई ऊंचाई दी। आज भारत वैश्विक मंचों पर अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने राष्ट्रीय हितों की पैरवी करता दिखाई देता है।
निश्चित रूप से रोजगार सृजन, कृषि सुधार, शिक्षा की गुणवत्ता और आय असमानता जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि पिछले एक दशक में भारत की विकास गति, डिजिटल परिवर्तन, आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा, सांस्कृतिक चेतना और वैश्विक प्रतिष्ठा में जो व्यापक बदलाव आया है, उसने देश की दिशा और सोच दोनों को बदल दिया है।
यदि नेहरू को आधुनिक भारत की संस्थागत नींव का निर्माता कहा जाता है तो नरेंद्र मोदी को उस भारत को गति, तकनीक, आत्मविश्वास और वैश्विक पहचान देने वाले नेता के रूप में देखा जा सकता है। इतिहास दोनों का मूल्यांकन अपने-अपने समय और परिस्थितियों के आधार पर करेगा, किंतु यह निर्विवाद है कि सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का कार्यकाल भारत की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुका है और विकसित भारत के लक्ष्य को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।










