रांची, 10 जून।
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को लेकर उठा विवाद अब सड़कों पर आ गया है। बुधवार को विधानसभा परिसर के बाहर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन कर उनके नामांकन को रद्द करने की मांग उठाई। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के आमने-सामने आने से स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, सुबोध कांत सहाय और मंत्री डॉ. इरफान अंसारी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अलग-अलग राज्यों में दोहरे मानदंड अपना रहा है। उनका तर्क है कि जहां तकनीकी खामियों के आधार पर मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त कर दिया गया, वहीं परिमल नाथवानी को झारखंड में नामांकन में सुधार का अवसर दिया जा रहा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि नामांकन रद्द नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे।
इस प्रदर्शन के दौरान विधानसभा के गेट संख्या-2 पर सुरक्षा घेरा उस समय टूट गया जब कुछ कांग्रेस समर्थक परिसर के अंदर दाखिल हो गए, जिससे सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसी बीच भाजपा कार्यकर्ता भी मौके पर पहुँच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपा विधायक सीपी सिंह ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस समर्थकों को अंदर जाने दिया गया, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं को बाहर ही रोक दिया गया।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। फिलहाल सभी की निगाहें रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर टिकी हैं, जहां परिमल नाथवानी के नामांकन पर आपत्तियों को लेकर सुनवाई जारी रही। इस प्रक्रिया में कांग्रेस, झामुमो और निर्दलीय प्रत्याशी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह निर्णय न केवल राज्यसभा चुनाव की तस्वीर साफ करेगा, बल्कि राज्य की राजनीति में आगामी दिनों के लिए एक नई दिशा भी तय करेगा।









