लखनऊ, 10 जून।
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया संसद भवन के क्वीन्स हॉल में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय समारोह के दौरान भारत की सांस्कृतिक विचारधारा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश गूंज उठा, जहां विश्व शांति और वैश्विक सहयोग में भारत की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
‘वर्ल्ड पीस एंड भारत गौरव अवार्ड्स सेरेमनी 2026’ में विभिन्न देशों के नीति-निर्माता, सांसद, राजनयिक और भारतीय मूल की विशिष्ट हस्तियां शामिल हुईं, जहां भारत की उस दर्शन पर चर्चा हुई जो संपूर्ण मानवता को एक परिवार के रूप में देखता है।
कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधि राकेश कुमार शुक्ल ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया युद्ध, आतंकवाद, जलवायु संकट और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे समय में भारत का प्राचीन दर्शन विश्व को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं बल्कि सहिष्णुता, स्वीकार्यता और विश्व बंधुत्व की हजारों वर्ष पुरानी विचारधारा का प्रतिनिधि है, जो मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ज्ञान, नवाचार, शांति और मानव कल्याण के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
समारोह में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी चर्चा हुई, जिसमें दोनों देशों को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता का प्रमुख साझेदार बताया गया।
वक्ताओं ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और ऑस्ट्रेलिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था मिलकर वैश्विक विकास का नया मॉडल प्रस्तुत कर रही है।
कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान चालीसा पाठ से हुई और इसमें विभिन्न देशों से आए अतिथियों की उपस्थिति में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विचार-विमर्श भी हुआ।
इस अवसर पर शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, सामाजिक सेवा और प्रशासन के क्षेत्र में योगदान देने वाली विभूतियों को भारत गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया।
समारोह में कहा गया कि यह सम्मान वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल की प्रतिभाओं के बढ़ते प्रभाव और योगदान का प्रतीक है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सॉफ्ट पावर को और मजबूत करता है।










