लखनऊ, 10 जून।
उत्तर प्रदेश में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग का सघन अभियान जारी है। इस 100 दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक प्रदेश भर में करीब 31 लाख लोगों की स्क्रीनिंग पूरी कर ली गई है। स्वास्थ्य जांच के इस बड़े अभियान में 1.43 लाख लोग टीबी रोगी के रूप में सामने आए हैं। इनमें से 41 हजार से अधिक ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जिनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। इन सभी रोगियों का त्वरित उपचार सुनिश्चित किया गया है।
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि अभियान में सुस्त गति वाले क्षेत्रों में माइक्रोप्लान को और प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने घर-घर जाकर जन-जागरूकता बढ़ाने और सभी आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से निक्षय पोर्टल पर रियल-टाइम अपडेट करने के सख्त निर्देश दिए हैं। आगामी बैठक में सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है।
अभियान के 77 दिनों में प्रदेश के उच्च जोखिम वाले गांवों, शहरी मलिन बस्तियों और संवेदनशील इलाकों में 17,960 आयुष्मान आरोग्य शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में केवल टीबी की जांच ही नहीं, बल्कि मधुमेह, हीमोग्लोबिन और रक्तचाप जैसी अन्य जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं भी एक छत के नीचे मुहैया कराई जा रही हैं। व्यापक कवरेज के लिए प्रदेश के 26,722 क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है।
विभाग ने तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया है। अब तक 22 लाख से अधिक लोगों के एक्स-रे किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 2578 नैट मशीन के माध्यम से 6 लाख से ज्यादा मॉलिक्यूलर जांचों को पूरा कर रिकॉर्ड बनाया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य इन शिविरों के माध्यम से आमजन तक समग्र स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना है।









