नई दिल्ली, 10 जून।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के फैसले पर अब बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इसे पूरी तरह अवैध करार दिया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय को कानून की गलत व्याख्या बताया और चुनाव आयोग से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
सिंघवी ने तर्क दिया कि किसी मामले में नोटिस मिलना आपराधिक मुकदमा नहीं माना जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक न्यायालय मामले का संज्ञान नहीं लेता, तब तक उसे नामांकन में दर्शाना अनिवार्य नहीं होता है।
रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने भाजपा द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति के बाद यह कार्रवाई की है। भाजपा का आरोप है कि नटराजन ने तेलंगाना के एक लंबित मामले की जानकारी नामांकन पत्र में छिपाई थी।
कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि यह केवल एक दीवानी प्रकृति का नोटिस था जिसका जवाब पहले ही दिया जा चुका था। इसे आधार बनाकर नामांकन खारिज करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान है।
मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा पर राजनीतिक दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पर्याप्त संख्या बल न होने के कारण भाजपा चुनावी प्रक्रिया में बाधाएं उत्पन्न कर रही है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला बताया है। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर उच्चतम न्यायालय और चुनाव आयोग के दरवाजे खटखटाने की रणनीति बनाई है।
इस फैसले का सीधा असर मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों के परिणामों पर पड़ सकता है। यदि कांग्रेस को राहत नहीं मिलती है, तो भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की जीत का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।










