कोलकाता।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी अंदरूनी कलह और राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुस्मिता देव ने संसद की सदस्यता सहित पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। चालू सप्ताह के भीतर ही उच्च सदन से त्यागपत्र देने वाली वह तृणमूल कांग्रेस की दूसरी बड़ी नेता बन गई हैं। विशेष बात यह है कि राजनीतिक घटनाक्रमों से भरा यह हफ्ता अभी अपने शुरुआती दौर में ही है।
निवर्तमान नेता सुस्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को संबोधित अपने त्यागपत्र में लिखा है कि वह राज्यसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप रही हैं, जिसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए। इस निर्णय के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो और तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें सुस्मिता देव असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मुस्कुराती हुई दिखाई दे रही हैं। जब संवाददाताओं ने उनसे इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थों और असम कनेक्शन को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इसका केवल असम से जुड़ाव है।
उल्लेखनीय है कि 53 वर्षीय सुस्मिता देव वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं और तब उन्होंने जनसेवा के एक नए अध्याय की शुरुआत करने की बात कही थी। वह असम कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे संतोष मोहन देव की पुत्री हैं और पूर्व में कांग्रेस की महिला विंग 'ऑल इंडिया महिला कांग्रेस' की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। इसके पूर्व वह अपने पिता के मजबूत गढ़ माने जाने वाले असम के सिलचर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद भी रह चुकी हैं।
इससे पूर्व, सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता तथा राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने भी संसद और पार्टी दोनों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। राय ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की सत्ता पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र के वादों को पूरा करने के लिए काम शुरू कर दिया है। वह विधानसभा चुनावों में जनता द्वारा दिए गए इस जनादेश को स्वीकार करते हुए राज्यसभा की सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह बड़ा संगठनात्मक संकट पश्चिम बंगाल विधानमंडल दल में हुए एक अभूतपूर्व विद्रोह के ठीक बाद सामने आया है। हाल ही में पार्टी के 58 विधायकों ने आधिकारिक नेतृत्व से असहमति जताते हुए पार्टी के घोषित उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय के स्थान पर ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के पद के लिए समर्थन दे दिया था। इस आंतरिक बगावत के बाद विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी गई। राज्य विधानसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद सामने आए इस घटनाक्रम ने संगठन के भीतर की गहरी दरारों को उजागर कर दिया है, जिससे पार्टी में असंतोष और अधिक फैलने की आशंका बढ़ गई है।







