पूर्वी सिंहभूम, 10 जून।
बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना को लेकर जारी जन आंदोलन ने अब एक आक्रामक रूप ले लिया है। बागबेड़ा महानगर विकास समिति के अध्यक्ष सुबोध झा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने योजना के विभिन्न निर्माण स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान समिति की संरक्षक दुखनी सोरेन भी प्रमुखता से मौजूद रहीं। निरीक्षण दल ने परियोजना की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए इसे घोर लापरवाही का परिणाम बताया है।
सुबोध झा ने आरोप लगाया कि 29 मई 2026 को प्रशासन द्वारा दावा किया गया था कि जून महीने तक जलापूर्ति सुचारू हो जाएगी, परंतु जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं पर जनता एवं न्यायालय को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनके अनुसार, अभी भी कई महत्वपूर्ण कार्य अधूरे हैं, जिससे 15 जून तक पानी मिलना असंभव प्रतीत होता है।
दुखनी सोरेन ने स्पष्ट किया कि जब तक क्षेत्र में जलापूर्ति बहाल नहीं हो जाती, वे अपने निजी टैंकरों से लोगों को पानी पहुंचाती रहेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि परियोजना में व्याप्त भ्रष्टाचार और निर्माण में बरती गई अनियमितताओं के विरुद्ध अब जन जागरण अभियान तेज किया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो विधानसभा का घेराव और पदयात्रा जैसे सख्त कदम भी उठाए जाएंगे।
निरीक्षण के दौरान फिल्टर प्लांट और इंटक वेल की संरचनाओं में निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए गए। प्रतिनिधिमंडल ने दीवारों में दरारें और कमजोर प्लास्टर होने का दावा किया, साथ ही आरोप लगाया कि खामियों को रंग-रोगन से ढकने का प्रयास किया जा रहा है। समिति ने पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की मांग की है।












