दार्जिलिंग, 10 जून।
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र दार्जिलिंग से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है । लंबे समय से चली आ रही पहाड़ की जटिल राजनैतिक समस्या के स्थायी राजनीतिक समाधान (पीपीएस) की दिशा में अब केंद्र सरकार ने अपनी पहल को काफी तेज कर दिया है । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दार्जिलिंग पहाड़ की इस पुरानी राजनीतिक जटिलता को सुलझाने और सभी पक्षों के बीच आम सहमति बनाने के लिए पंकज कुमार सिंह को आधिकारिक मध्यस्थ (वार्ताकार) नियुक्त किया था । इस बड़ी जिम्मेदारी को संभालने के बाद पहली बार उन्होंने भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के शक्तिशाली अध्यक्ष और गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) के मुख्य कार्यपालक अनीत थापा के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की है ।
राजनीतिक विश्लेषक और विशेषज्ञ इस समन्वय बैठक को आगामी पहाड़ी राजनीति के लिहाज से बेहद अहम और ऐतिहासिक मान रहे हैं । दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों के नागरिकों की यह दशकों पुरानी और प्रमुख मांग रही है कि इस पूरे क्षेत्र की प्रशासनिक व क्षेत्रीय समस्याओं का एक स्थायी, ठोस और सर्वमान्य राजनीतिक समाधान निकाला जाए । जीटीए प्रमुख अनीत थापा भी लगातार कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों से इस गंभीर मुद्दे को प्रखरता से उठाते रहे हैं । इसी सिलसिले में बुधवार को आयोजित हुई इस विशेष बैठक में मुख्य रूप से पहाड़ की विभिन्न समस्याओं के स्थायी व शीघ्र समाधान के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई । इस महत्वपूर्ण बैठक के संपन्न होने के बाद अनीत थापा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मध्यस्थ के साथ हुई यह चर्चा बेहद सकारात्मक, सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक रही है, जिससे दार्जिलिंग पहाड़ के समग्र विकास और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक गतिरोध को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक नई उम्मीद जगी है ।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ पंकज कुमार सिंह ने भी सकारात्मक संकेत देते हुए स्पष्ट किया है कि वे दार्जिलिंग क्षेत्र के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों और विभिन्न हितधारकों से क्रमिक बातचीत कर एक ठोस समाधान निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं । इस बड़ी राजनीतिक हलचल के बाद अब समूचे उत्तर बंगाल के साथ-साथ देश की नजरें भी इस बात पर टिकी हुई हैं कि केंद्र की इस नई त्रिपक्षीय पहल के बाद दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों की लंबे समय से लंबित पड़ी समस्याओं का समाधान आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका वहाँ के आम लोगों के सामाजिक व आर्थिक जीवन पर कितना सकारात्मक असर पड़ता है ।









