इस्लामाबाद, 13 जून।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच तीन महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। दोनों देशों ने शांति समझौते के एक प्रारंभिक ढांचे पर सहमति बना ली है और अगले 24 घंटों के भीतर प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
पाकिस्तान, जो इस पूरे घटनाक्रम में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ने बताया कि समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर की तैयारी की जा रही है। इसके बाद अगले सप्ताह तकनीकी स्तर की वार्ताएं आयोजित की जाएंगी।
शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों पक्ष पहले से कहीं अधिक शांति समझौते के करीब पहुंच चुके हैं और यह संभावित समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव साबित हो सकता है।
संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों के बाद हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि लेबनान में ईरान समर्थित समूहों और इजराइल के बीच भी संघर्ष तेज हो गया। इस युद्ध में हजारों लोगों की जान गई और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी इसका व्यापक असर पड़ा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि मसौदे में कुछ बदलाव की संभावना अभी भी बनी हुई है, लेकिन मौजूदा सहमति से यह स्पष्ट है कि ईरान संघर्ष के बाद अधिक मजबूत स्थिति में उभरा है।
प्रस्तावित समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अलग चरण में विस्तृत वार्ता की जाएगी।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समझौता उनके प्रमुख उद्देश्यों के अनुरूप है और आगे की बातचीत के लिए सकारात्मक आधार तैयार करता है। दूसरी ओर ईरान का रुख यह है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा और संवर्धित यूरेनियम के सीमित उपयोग को लेकर चर्चा जारी रहेगी।
सूत्रों के अनुसार संभावित समझौते में युद्ध क्षतिपूर्ति, क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य विवादित विषयों पर भी विचार-विमर्श का प्रावधान रखा गया है। हालांकि इन बिंदुओं पर दोनों पक्षों के दावों में अभी भी कुछ मतभेद बने हुए हैं।















