बांकुड़ा, 17 जून।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिली है। तृणमूल कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा, जब बांकुड़ा नगरनिगम की मेयर अलका सेन मजूमदार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बुधवार को अपना त्यागपत्र जिला एसडीओ को सौंप दिया। इस घटनाक्रम के बाद जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस्तीफे के बाद अलका सेन मजूमदार ने कहा कि पार्टी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास किया। उनके अनुसार, व्यक्तिगत कारणों और संगठन के फैसले का सम्मान करते हुए उन्होंने मेयर पद छोड़ने का निर्णय लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी भविष्य में उन्हें जो भी दायित्व देगी, उसका निर्वहन वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ करेंगी। उन्होंने अपने फैसले को संगठन के प्रति सम्मान और व्यक्तिगत परिस्थितियों से जुड़ा बताया।
अलका सेन मजूमदार ने वर्ष 2022 में तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में गठित नगरनिगम बोर्ड के बाद मेयर पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल में बांकुड़ा नगरनिगम कई बार राजनीतिक खींचतान और विवादों को लेकर चर्चा में रहा।
नगरनिगम के भीतर मतभेद, पार्षदों की नाराजगी और प्रशासनिक निर्णयों पर उठे सवालों ने समय-समय पर संगठन और प्रशासन दोनों के सामने चुनौतियां खड़ी की थीं। इन कारणों से बोर्ड की कार्यप्रणाली भी कई बार सुर्खियों में रही।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे दौर में मेयर का इस्तीफा कई सवालों को जन्म देता है, जब राज्य में पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अलका सेन मजूमदार ने अपने त्यागपत्र को पूरी तरह व्यक्तिगत कारणों से जुड़ा बताया है।
दूसरी ओर, विपक्षी दल इस घटनाक्रम को पार्टी के भीतर बढ़ रहे असंतोष से जोड़कर देख रहे हैं। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं जारी हैं।
फिलहाल, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस विषय पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बांकुड़ा नगरनिगम के नए मेयर की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है और इस इस्तीफे के पीछे कोई व्यापक राजनीतिक संकेत है या नहीं।













