मध्य प्रदेश
17 Jun, 2026

यूसीसी से सामाजिक समानता और न्याय को मिलेगा बल: बुधपाल सिंह

अनूपपुर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उच्च स्तरीय समिति के सदस्य बुधपाल सिंह ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए सामाजिक समानता, न्याय और कल्याण सुनिश्चित करना है।

अनूपपुर, 17 जून।

अनूपपुर कलेक्ट्रेट के नर्मदा सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के अध्ययन और परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्य बुधपाल सिंह ने संहिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है और इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए सामाजिक समानता, न्याय और कल्याण सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता की अवधारणा नई नहीं है। गोवा में यह व्यवस्था लंबे समय से प्रभावी है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड, गुजरात और असम द्वारा इस दिशा में पहल किए जाने के बाद मध्यप्रदेश भी इसे लागू करने की प्रक्रिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस दौरान सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से संहिता को अधिक व्यवहारिक और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव लिए गए।

बुधपाल सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था में जनजातीय समुदाय की परंपराओं, संस्कृति और रीति-रिवाजों का पूरा सम्मान किया गया है। इसी कारण अनुसूचित जनजातियों को संहिता के दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यूसीसी लागू होने से किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक गतिविधियों अथवा नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होगी, क्योंकि इसका दायरा केवल सामाजिक और नागरिक सुधारों तक सीमित रहेगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के तहत संचालित होते हैं। यूसीसी का उद्देश्य इन विषयों पर एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। उनका कहना था कि इससे विशेष रूप से महिलाओं को समान अधिकार मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत विवाह का अनिवार्य पंजीकरण, बेटों और बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, धर्मनिरपेक्ष गोद लेने की प्रक्रिया तथा बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

बैठक में उपस्थित नागरिकों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव साझा किए। वक्ताओं ने विवाह की आयु, भरण-पोषण से जुड़े प्रावधानों तथा लिव-इन रिलेशनशिप के नियमन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने पर जोर दिया। साथ ही लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता भी बताई, ताकि किसी प्रकार की भ्रांतियों और अफवाहों को रोका जा सके।

इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य रंजीत सर्राटी, नगर पालिका परिषद अनूपपुर की उपाध्यक्ष सोनाली तिवारी, नगर परिषद डूमर कछार के अध्यक्ष सुनील कुमार चौरसिया, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संतोष परिहार सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में कलेक्टर हर्षल पंचोली ने बताया कि शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंचकर नागरिकों से सीधे सुझाव प्राप्त कर रही है। उन्होंने अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की कि आगामी पांच दिनों में इस प्रक्रिया को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जो लोग बैठक में शामिल नहीं हो सके हैं, वे आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने सुझाव दर्ज कर सकते हैं, ताकि सभी वर्गों की सहभागिता के साथ एक समावेशी और न्यायसंगत प्रारूप तैयार किया जा सके।

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