इंदौर, 18 जून।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर के खंडवा रोड स्थित 100 वर्ष से अधिक पुराने लिंबोदी तालाब पहुंचकर श्रमदान किया और वहां चल रहे जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने नागरिकों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है”, जल ही जीवन का आधार है और इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण करें, आसपास स्वच्छता बनाए रखें और जल की एक-एक बूंद को बचाने का संकल्प लें।
उन्होंने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत तालाबों, कुओं और बावड़ियों के गहरीकरण, सफाई और संरक्षण का कार्य व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत गुड़ी-पड़वा से की गई थी और अब तक प्रदेश में 2 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर शहर में 10 से अधिक बड़े तालाबों तथा 250 से अधिक कुओं और बावड़ियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में देश-दुनिया में पहचान बना चुका इंदौर अब जल संरक्षण में भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि तालाबों और जलमार्गों पर हुए अतिक्रमणों को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि जल स्रोतों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने श्रमदान कर स्थानीय लोगों को प्रेरित किया और उन्हें जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक मधु वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
महापौर ने बताया कि अमृत 2.0 योजना के तहत तालाबों के संरक्षण में स्टोन बोल्डर पिचिंग, टो-वॉल निर्माण, रैलिंग, इको-फ्रेंडली पाथवे और स्टोन बेंच जैसे विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि यह तालाब लगभग एक सदी पहले होलकर शासनकाल में निर्मित किया गया था।















