जेनेवा, 19 जून।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया है। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने सिंधु जल समझौते को वर्तमान समय के हिसाब से अप्रासंगिक करार दिया है।
भारत का मानना है कि छह दशक पुराना यह समझौता आज की सच्चाई से पूरी तरह दूर हो चुका है। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश इस द्विपक्षीय सहयोग के फायदों की उम्मीद नहीं रख सकता।
सिंधु जल संधि को लेकर भारत का रुख पूरी तरह साफ है। एक तरफ सीमा पार से आतंकवाद की नीति चलाना और दूसरी तरफ सद्भावना पर टिके समझौते के अधिकारों की मांग करना पूरी तरह तर्कहीन है।
वर्ष 1960 में हुआ यह समझौता हमेशा के लिए अपरिवर्तनीय नहीं रह सकता। तकनीकी व्यवस्थाएं समय के साथ जवाबदेही और बदलावों से अछूती नहीं रह सकतीं।
भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर द्विपक्षीय मुद्दों को उठाने की आदत की भी कड़ी आलोचना की। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्रों पर नजर डालने के बजाय अपनी आंतरिक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। अपने देश के हालात सुधारना ही पड़ोसी देश के हित में होगा।










