जेनेवा, 19 जून।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों और आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारतीय पक्ष ने वैश्विक मंच पर दृढ़ता से दोहराया कि जम्मू और कश्मीर हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा रहा है और हमेशा रहेगा।
मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश अपनी घरेलू नाकामियों और आतंकवाद को लगातार मिल रहे समर्थन से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के झूठे दुष्प्रचार का सहारा ले रहा है। भारत ने स्पष्ट किया कि कश्मीर को लेकर एकमात्र अनसुलझा मुद्दा सिर्फ पाकिस्तानी कब्जे वाले क्षेत्रों की वापसी है।
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान की चालबाजी को बेनकाब करते हुए कहा कि वहां की सरकार पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में चल रहे तीव्र जन-आक्रोश और विरोध प्रदर्शनों को छिपाने की कोशिश कर रही है। रावलकोट में हुई हालिया हिंसक घटनाएं, आम नागरिकों की हत्याएं और वहां की जनता पर किया जा रहा क्रूर दमन इस बात का प्रमाण है कि अवैध कब्जा और जबरन दमन कभी सफल नहीं हो सकते।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि दशकों से जारी सैन्य भूमि कब्जों, जनसांख्यिकीय बदलावों और मौलिक स्वतंत्रताओं के हनन के कारण आज वहां के हालात बदतर हो चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि बिजली, रोटी, अधिकार और सम्मान जैसी बुनियादी मांगें करने वाले नागरिकों का सामना गोलियों और बेरहमी से किया जा रहा है। भारत ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के झूठे दावों से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी।









