मुरैना, 23 जून।
राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य और अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्रों में हो रहे अवैध रेत खनन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए प्रशासन ने संयुक्त रणनीति तैयार की है। इसी उद्देश्य से मुरैना के देवरी स्थित सर्किट हाउस में अंतरराज्यीय माइनिंग टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई, जिसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में मुरैना, धौलपुर और आगरा जिलों के प्रशासन, पुलिस, वन एवं खनिज विभाग के अधिकारियों ने अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन के खिलाफ समन्वित कार्रवाई पर चर्चा की। अधिकारियों ने सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त प्रवर्तन अभियान को और प्रभावी बनाने पर सहमति जताई।
चंबल संभाग आयुक्त सुरेश कुमार ने निर्देश दिए कि सभी जिले अपने क्षेत्र के घाटों, चेकपोस्टों, संवेदनशील स्थलों, नदी किनारे बसे गांवों और तैनात अमले की अद्यतन जानकारी साझा करें। उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
डीआईजी सुनील जैन ने अवैध खनन रोकने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति अपनाने पर जोर दिया। इसके तहत खनन स्थलों और घाटों की निगरानी, परिवहन मार्गों पर वाहनों की जांच तथा अवैध रेत के भंडारण और उपयोग वाले स्थानों पर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बिना पंजीयन वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों के खिलाफ सख्त कदम उठाने, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और राज्यों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए।
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा कि सीमावर्ती जिलों के बीच निरंतर समन्वय के बिना अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। उन्होंने सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल रूम और सर्विलांस सिस्टम के अधिक उपयोग पर बल देते हुए संदिग्ध वाहनों पर त्वरित कार्रवाई के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की बात कही।
पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा ने अवैध उत्खनन और परिवहन में शामिल लोगों की जानकारी राज्यों और जिलों के बीच साझा करने पर जोर दिया। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में संयुक्त गश्त और निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
बैठक में ड्रोन निगरानी, रियल टाइम डेटा शेयरिंग सिस्टम, संयुक्त नियंत्रण कक्ष को मजबूत करने और डिजिटल मॉनिटरिंग बढ़ाने का निर्णय लिया गया। साथ ही वैध खनिज परिवहन वाहनों में जीपीएस प्रणाली और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य करने पर भी सहमति बनी।
अधिकारियों ने तय किया कि जब्ती, गिरफ्तारी और अन्य कार्रवाई के लिए एक समान प्रक्रिया विकसित की जाएगी। साथ ही अंतरराज्यीय माइनिंग टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक प्रत्येक तीन माह में आयोजित कर कार्रवाई की प्रगति का आकलन किया जाएगा।










