नई दिल्ली, 23 जून।
नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के इतर, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने एक उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता संपन्न की। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु दोनों देशों के मध्य संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया और आपसी जुड़ाव के महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित था। चर्चा के दौरान डोभाल ने बल देकर कहा कि एक स्थिर, पूर्वानुमानित और रचनात्मक द्विपक्षीय ढांचा ही दोनों राष्ट्रों के बीच विश्वास की बहाली और बेहतर समझ के लिए अपरिहार्य आधार प्रदान कर सकता है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि दोनों पक्षों ने हालिया घटनाक्रमों का सूक्ष्म विश्लेषण किया है और संबंधों के क्रमिक सुधार की दिशा में दर्ज की गई प्रगति का संज्ञान लिया है।
वर्ष 2020 में गलवान घाटी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के उपरांत उत्पन्न हुए चार वर्षीय सैन्य गतिरोध ने दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित किया था। पिछले एक वर्ष से, दोनों पक्षों ने इस तनाव को कम करने और आपसी विश्वास को पुनर्जीवित करने के लिए सिलसिलेवार उपचारात्मक कदम उठाए हैं। विशेष रूप से पिछले वर्ष अगस्त में संपन्न विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति स्थापना की दिशा में ठोस परिणाम प्रदान किए हैं।
राजनयिक और सैन्य स्तर की गहन वार्ता प्रक्रियाओं का ही यह प्रतिफल है कि पूर्वी लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के कई संवेदनशील बिंदुओं से सेनाओं का सफलतापूर्वक विस्थापन सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान संवाद का मुख्य उद्देश्य निरंतर जारी सैन्य गतिरोध के शेष बिंदुओं का समाधान करते हुए सीमाओं पर दीर्घकालिक शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना है। यह कूटनीतिक प्रयास भविष्य में दोनों देशों के मध्य एक संतुलित और सामान्य रणनीतिक स्थिति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।









