मुंबई, 23 जून।
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और अनुभवी राजनेता राज बब्बर आज अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। 23 जून 1952 को उत्तर प्रदेश के टुंडला में जन्मे राज बब्बर का फिल्मी सफर संघर्ष और सफलता की एक अद्भुत दास्तान है। नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (एनएसडी) से अभिनय की बारीकियां सीखने के बाद, 1975 में उन्होंने सपनों की नगरी मुंबई का रुख किया। शुरुआती दौर में उन्होंने काफी कठिनाइयां झेलीं, यहां तक कि वे निर्माता प्रकाश मेहरा के ऑफिस के एक छोटे से कमरे में रहकर अपने करियर को संवारने के लिए संघर्ष करते रहे।
उनके अभिनय करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 1980 में बी. आर. चोपड़ा की फिल्म 'इंसाफ का तराज़ू' से आया। इस फिल्म में नकारात्मक भूमिका निभाने का जोखिम उठाकर उन्होंने अपनी प्रभावशाली अदाकारी से दर्शकों के दिलों में जगह बना ली। इस सफलता के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 'निकाह', 'आवाम' और 'किरायेदार' जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया, साथ ही 'प्रेम गीत' और 'अगर तुम ना होते' जैसी फिल्मों के जरिए एक संवेदनशील रोमांटिक अभिनेता के रूप में भी खुद को स्थापित किया।
राज बब्बर की बहुमुखी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने हिंदी के साथ-साथ पंजाबी सिनेमा में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी फिल्म 'चन्न परदेसी' आज भी एक कालजयी फिल्म मानी जाती है। अभिनय के साथ-साथ उनका राजनीतिक सफर भी काफी सक्रिय रहा। 90 के दशक में राजनीति में कदम रखने के बाद उन्होंने संसद में किसानों और मजदूरों के हितों के लिए मुखर होकर आवाज उठाई। चार दशक से अधिक के अपने करियर में 260 से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके राज बब्बर आज भी अभिनय और जनसेवा के क्षेत्र में









