मध्य प्रदेश
23 Jun, 2026

परोपकारी संस्थाओं के सहयोग से मजबूत होगा ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा

मध्य प्रदेश में प्रस्तावित मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत परोपकारी संस्थाओं की भागीदारी से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है।

भोपाल, 23 जून।

प्रदेश में ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने और उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से प्रस्तावित मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 पर मंत्रिपरिषद समिति ने विस्तृत मंथन किया। उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में वल्लभ भवन में आयोजित बैठक में नीति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

बैठक में समिति के सदस्यों ने नीति को अधिक जनहितकारी, सेवा-उन्मुख और गरीब तथा वंचित वर्गों की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। चर्चा का मुख्य फोकस प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने पर रहा।

राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों और उन्नत चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए परोपकारी संस्थाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य संस्थान मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित हैं, जिसके कारण अन्य क्षेत्रों के मरीजों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को प्रभावित करती है।

प्रस्तावित नीति के माध्यम से प्रदेश में तृतीयक और सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा, विशेषज्ञ और एमबीबीएस चिकित्सकों की उपलब्धता में वृद्धि तथा गरीब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा अन्य राज्यों में इलाज के लिए होने वाले मरीजों के पलायन को कम करने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार पर भी विशेष जोर दिया गया है।

नीति के तहत केवल सेवा-आधारित और लाभ-निरपेक्ष संस्थाओं को पात्र माना जाएगा। इसमें पंजीकृत ट्रस्ट, सोसायटी और कंपनी अधिनियम की धारा 8 के अंतर्गत स्थापित संस्थाएं शामिल हो सकेंगी। ऐसे संगठनों को प्राथमिकता देने का भी प्रस्ताव है, जो चिकित्सा महाविद्यालय और नर्सिंग कॉलेज जैसी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करेंगे।

बैठक में रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों पर अनुदान देने तथा विभिन्न अनुमतियों के लिए सिंगल-पॉइंट क्लियरेंस व्यवस्था विकसित करने जैसे प्रावधानों पर भी विचार किया गया।

समिति ने सुझाव दिया कि नीति का केंद्र बिंदु आम नागरिकों, विशेषकर गरीब और वंचित वर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। साथ ही इसे अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी स्वरूप देने पर बल दिया गया।

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